उत्तर प्रदेश के जेवर में देश की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यहां राफेल और मिराज 2000 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की मरम्मत और रखरखाव के लिए एक आधुनिक MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहालिंग) सेंटर बनने जा रहा है। ये परियोजना फ्रांस की प्रसिद्ध डिफेंस और एविएशन कंपनी डसाल्ट एविएशन द्वारा प्रस्तावित की गई है, जिसने इसके लिए यमुना प्राधिकरण से जमीन की मांग की है। इस सेंटर की स्थापना से न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को बल मिलेगा, बल्कि देश की विदेशी MRO पर निर्भरता भी कम होगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक बनने वाला यह सेंटर तकनीकी विकास, रोजगार सृजन और कौशल निर्माण के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। खास बात यह है कि कंपनी यहां स्किल यूनिवर्सिटी भी स्थापित करेगी, जिससे युवाओं को एविएशन सेक्टर में प्रशिक्षण और करियर के नए अवसर मिलेंगे।
यमुना प्राधिकरण को मिला कंपनी का प्रस्ताव
डसाल्ट एविएशन ने ये प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया था, जो प्रदेश सरकार होते हुए यमुना प्राधिकरण तक पहुंचा। अब प्राधिकरण ने कंपनी से जमीन की जरूरत की जानकारी मांगी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 1365 हेक्टेयर जमीन पहले से ही MRO के लिए अधिग्रहित की गई है।
स्किल यूनिवर्सिटी भी बनेगी
MRO में काम करने वाले कुशल लोगों की जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनी एक स्किल यूनिवर्सिटी भी बनाएगी। इसमें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस से जुड़े डिप्लोमा, स्नातक और शॉर्ट टर्म कोर्स कराए जाएंगे। 10वीं-12वीं पास छात्र भी इसमें दाखिला ले सकेंगे।
सिविल और डिफेंस दोनों सेक्टर की सेवा
ये MRO न सिर्फ वायुसेना के लड़ाकू विमानों की मरम्मत करेगा, बल्कि यात्री विमानों की देखरेख के लिए भी काम करेगा। डसाल्ट सिविल और डिफेंस दोनों के लिए ये सुविधा विकसित करना चाहती है।
भारत में अभी सीमित MRO सुविधा
भारत में फिलहाल विमानों की मरम्मत की सीमित सुविधा है। अधिकतर विमानों को मरम्मत के लिए चीन, सिंगापुर या अमेरिका भेजना पड़ता है। लेकिन जेवर में MRO बनने से ये जरूरत देश में ही पूरी हो सकेगी।
रोजगार और निवेश में आएगा बड़ा उछाल
राज्य सरकार के अनुसार, MRO सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। 2021 में इसका बाजार 170 करोड़ था जो 2030 तक 700 करोड़ तक पहुंच सकता है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं सरकार की FDI नीति के तहत निवेशकों को सब्सिडी और टैक्स में छूट जैसे कई फायदे भी मिलेंगे।
नोएडा एयरपोर्ट परिसर में भी अलग MRO
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में भी 40 एकड़ में MRO की योजना है, जिसे एयरपोर्ट चालू होने के 10 साल के भीतर विकसित करना होगा। हालांकि इसमें सीमित सेवाएं ही दी जाएंगी।