कई बार हम किसी दूसरे व्यक्ति को परेशानी में देखकर तुरंत सोचने लगते हैं कि उसे क्या करना चाहिए या उसकी जगह हम होते तो क्या करते। लेकिन किसी मुश्किल को बाहर से देखना और खुद उस मुश्किल से गुजरना, दोनों बिल्कुल अलग एक्सपीरियंस होते हैं। जब हम सेफ और अच्छी सिचुएशन में होते हैं, तो दूसरे की परेशानी का हल हमें बहुत आसान दिखाई देता है। आज की स्पेनिश कहावत इसी बात को बारिश के एक आसान उदाहरण से समझाती है।
बारिश को देखना और न भीगना कितना अच्छा लगता है। जब हम बारिश से सेफ जगह पर खड़े होते हैं, तो बारिश का नजारा अच्छा और सुकून देने वाला लग सकता है। लेकिन जो व्यक्ति उसी समय बारिश में फंसा हुआ है, उसके लिए वही बारिश परेशानी बन सकती है। ठीक इसी तरह, दूसरों की मुश्किलें हमें बाहर से छोटी या आसान लग सकती हैं, क्योंकि हम खुद उस समय उस परेशानी का सामना नहीं कर रहे होते।
जब हम किसी परेशानी से दूर होते हैं, तो पूरी सिचुएशन को शांत दिमाग से देख पाते हैं। इसलिए हमें यह समझना आसान लगता है कि सामने वाले को क्या करना चाहिए। लेकिन जिस व्यक्ति पर वह परेशानी खुद आई होती है, उसके लिए हालात इतने आसान नहीं होते। उसके मन में डर, चिंता और कई तरह के सवाल चल रहे हो सकते हैं। इसलिए किसी की सिचुएशन को सिर्फ बाहर से देखकर डिसीजन लेना सही नहीं है।
दूसरे की परेशानी को समझने के लिए यह याद रखना जरूरी है कि हर इंसान के हालात अलग होते हैं। किसी के लिए पैसों की समस्या बड़ी चिंता हो सकती है, तो किसी के लिए नौकरी, परिवार या रिश्ते से जुड़ी परेशानी बहुत भारी हो सकती है। देखने वाले को इसका हल आसान दिखाई दे सकता है, लेकिन परेशानी झेल रहे इंसान के लिए हर कदम सोचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सलाह देने से पहले उसकी सिचुएशन और फीलिंग को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
जब हम किसी समस्या से खुद नहीं गुजर रहे होते, तो उससे हमारा इमोशनल टच कम होता है। इसी वजह से हमें सब आसान लगता है। हम आसानी से कह देते हैं कि “ऐसा कर लेते” या “यह फैसला ले लेते”, लेकिन उस समय सामने वाले के पास कितने ऑप्शन थे, यह हमें पता नहीं होता। हमें यह सोचना चाहिए कि यदि हम उसी जगह होते तो हमें कैसा महसूस होता।
कहावत हमें अपने अच्छे समय की कद्र करना भी सिखाती है। जब हमारी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तो हमें अपनी शांति और आराम अच्छे लगने लगते हैं। लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति को मुश्किल में देखकर हमें एहसास हो सकता है कि सेफ और सुकून भरी जिंदगी कितनी बड़ी बात है। इसका मतलब यह नहीं कि हमें किसी की परेशानी देखकर खुश होना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करनी चाहिए।
इस कहावत की सबसे बड़ी सीख यही है कि किसी के हालात को बाहर से देखकर तुरंत फैसला नहीं करना चाहिए। जो परेशानी हमें दूर से छोटी लग रही है, हो सकता है वही किसी दूसरे व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी हो। इसलिए किसी को सलाह देने या उसकी आलोचना करने से पहले उसकी जगह खुद को रखकर सोचें।