1 मिनट में जानें केला असली है या नकली, FSSAI ने बताए आसान तरीके

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जो केला आप खा रहे हैं, वह स्वाभाविक रूप से पका है या उसे जल्दी तैयार करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल किया गया है? आजकल बाजार में मिलने वाले फलों की गुणवत्ता को लेकर यह सवाल काफी अहम हो गया है

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 1:35 PM
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भारत में FSSAI ने कैल्शियम कार्बाइड पर पूरी तरह बैन लगाया है।

केला एक ऐसा फल है, जो हर मौसम में आसानी से मिल जाता है और लगभग हर घर में खाया जाता है। नाश्ते से लेकर स्नैक्स और मिठाइयों तक, इसका इस्तेमाल कई तरीकों से किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें विटामिन B6, विटामिन C, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, केले में पाया जाने वाला पोटैशियम दिल की सेहत को मजबूत रखने और ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में मदद करता है।

वहीं, इसमें मौजूद ट्रिप्टोफैन मूड को अच्छा रखने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होता है। यही वजह है कि केला एक सरल, सस्ता और पौष्टिक फल माना जाता है, जिसे लोग अपनी डाइट में शामिल करना पसंद करते हैं।

हर पीला केला हेल्दी नहीं होता


आजकल बाजार में दिखने वाले सभी चमकदार केले प्राकृतिक नहीं होते। कई बार इन्हें जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

ऐसे पहचानें केमिकल से पके केले

अगर केले का बीच का हिस्सा पीला है, लेकिन दोनों सिरे हरे हैं, तो समझ लें कि उसे केमिकल से पकाया गया है। ऐसे केले अक्सर कैल्शियम कार्बाइड से पकाए जाते हैं, जिससे वे बाहर से तो पके दिखते हैं, लेकिन अंदर से पूरी तरह तैयार नहीं होते।

प्राकृतिक केले की पहचान

नेचुरल तरीके से पके केले के सिरे हल्के काले या भूरे हो जाते हैं। इसका मतलब है कि फल अपने समय पर बिना किसी मिलावट के पका है और खाने के लिए सुरक्षित है।

सेहत के लिए खतरनाक क्यों?

कैल्शियम कार्बाइड जैसे केमिकल पेट में जलन, दर्द, डायरिया और चक्कर जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा गले में खराश और सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।

FSSAI की गाइडलाइन क्या कहती है?

भारत में FSSAI ने कैल्शियम कार्बाइड पर पूरी तरह बैन लगाया है। इसके बजाय फलों को सुरक्षित तरीके से पकाने के लिए एथिलीन गैस के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी गई है, जिससे सेहत को नुकसान नहीं होता।

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