जैसे ही अप्रैल का महीना अलविदा कहता है, वैसे ही गर्मी अपना असली रंग दिखाने लगती है। मई और जून की दोपहरें लोगों को बेहाल कर देती हैं। तेज धूप, झुलसाता तापमान और घर के अंदर तक फैली तपन नेचुरल कूलिंग की अहमियत को और भी बढ़ा देती है। इन हालातों में कूलर और एसी जैसे उपकरण भले ही थोड़ी राहत दें, लेकिन इनका लगातार इस्तेमाल बिजली के बिल को बढ़ा देता है। ऐसे में देसी जुगाड़ और पारंपरिक तकनीकें फिर से चर्चा में आ जाती हैं, जो न सिर्फ खर्च कम करती हैं बल्कि घर को नैचुरल तरीके से ठंडा भी रखती हैं।
