क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि लोग आपसे बात करने में हिचकिचाते हैं या आपके मैसेज का जवाब देर से देते हैं? अक्सर हम सोचते हैं कि हम सब सही कर रहे हैं, लेकिन अनजाने में हमारी कुछ आदतें ही हमारी ‘इमेज’ को नुकसान पहुंचा देती हैं। सिर्फ बढ़िया कपड़े पहनना या ड्रेसिंग सेंस होना पर्सनालिटी नहीं बनाता, बल्कि आपकी बातचीत का तरीका और दूसरों के प्रति आपका रवैया भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई बार छोटी-छोटी बातें, जैसे दूसरों की परेशानियों को हल्का समझना, झूठी उम्मीदें देना या मैसेज का देर से जवाब देना, हमारी छवि को कमजोर कर देती हैं।
अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी कंपनी में समय बिताना पसंद करें और आपकी बातों में दिलचस्पी लें, तो कुछ आदतों को छोड़ना बेहद जरूरी है। इन आदतों में से 10 सबसे आम और हानिकारक आदतों पर हम आगे चर्चा करेंगे।
दूसरों की परेशानियों को हल्का समझना
जब कोई अपनी समस्या शेयर करे, उसे छोटा न आंकें। किसी की परेशानी को कम करके दिखाने से सामने वाला महसूस करता है कि आपको उसकी परवाह नहीं है। एक अच्छे श्रोता बनें और उनकी भावनाओं की कद्र करें।
मैसेज में दबाव डालना बंद करें
दोस्तों को ऐसे मैसेज भेजना बंद करें जिससे वे फंस जाएं या असहज महसूस करें। बातचीत सिंपल और स्पष्ट रखें, ताकि लोग आपसे खुलकर बात कर सकें।
बहस में अक्सर हम असली वजह पर ध्यान नहीं देते और गलत चीजों पर फोकस कर लेते हैं। विवाद को सुलझाने के लिए पहले असली समस्या को समझें, न कि अनुमान लगाएं।
हर किसी की राय अलग होती है। अगर कोई आपसे सहमत नहीं है, तो लड़ाई करने या परेशान होने की बजाय मतभेदों को सहजता से स्वीकार करें।
रिश्तों या काम में ‘ब्रेडक्रंबिंग’ यानी किसी को थोड़ी-थोड़ी उम्मीदें देकर उलझाए रखना बुरी आदत है। यदि दिलचस्पी नहीं है, स्पष्ट रहें।
पब्लिक में वीडियो कॉल न करें
सार्वजनिक जगहों पर जोर-जोर से कॉल करना दूसरों को परेशान करता है और आपकी इमेज भी खराब करता है।
कड़वी बातों को ईमानदारी न कहें
ईमानदारी और बदतमीजी में फर्क होता है। अपनी बात रखें, लेकिन शब्दों का चुनाव ऐसा करें कि सामने वाले का दिल न दुखे।
AI पर ज्यादा निर्भर न रहें
काम और बातचीत में AI मददगार है, लेकिन इंसानी रिश्तों और जज्बातों में अपने दिमाग और शब्दों का इस्तेमाल करें।
किसी का मैसेज पढ़कर जवाब न देना अपमान जैसा है। व्यस्त होने पर बाद में जवाब दें, पर इग्नोर करने की आदत छोड़ें।
हर खामोशी को भरने की कोशिश न करें
बातचीत में बीच-बीच की चुप्पी बुरी नहीं होती। इसे भरने की कोशिश न करें। कभी-कभी शांत रहना भी बातचीत को गहरा और प्रभावशाली बनाता है।
इन छोटी-छोटी आदतों को सुधारकर आप न सिर्फ बेहतर कम्युनिकेटर बन सकते हैं, बल्कि लोगों के दिलों में अपनी अलग जगह भी बना सकते हैं।