गर्मियों की तेज धूप और उमस भरे मौसम में जहां लोग पसीने और गर्मी से बेहाल हो जाते हैं, वहीं इस मौसम की सबसे बड़ी राहत बनकर आता है रस से भरा आम। “फलों का राजा” कहलाने वाला यह फल न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होता है, बल्कि अपनी खुशबू और मिठास से हर किसी का दिल जीत लेता है। भारत जैसे देश में तो आम की विविधता इसे और भी खास बना देती है। यहां अलग-अलग राज्यों में उगने वाली आम की किस्में अपने अनोखे स्वाद, रंग और बनावट के लिए जानी जाती हैं।
कोई आम बेहद मीठा होता है तो कोई हल्का खट्टा-मीठा स्वाद देता है। यही वजह है कि गर्मियों का मौसम आम के बिना अधूरा सा लगता है और लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।
महाराष्ट्र का हापुस आम दुनिया का सबसे प्रीमियम आम माना जाता है। इसका गाढ़ा केसरिया रंग, बिना रेशे वाला गूदा और बेहतरीन मिठास इसे खास बनाते हैं। विदेशों में भी इसकी भारी डिमांड रहती है और इसे GI टैग भी मिला हुआ है।
दशहरी आम की शुरुआत लखनऊ के पास एक छोटे से गांव के एक पेड़ से हुई थी। आज यह किस्म मलिहाबाद क्षेत्र की पहचान बन चुकी है, जो भारत के बड़े आम उत्पादन का केंद्र है। इसका स्वाद हल्का, मीठा और बेहद लोकप्रिय है।
उत्तर भारत खासकर बिहार में मशहूर चौसा आम अपनी जबरदस्त मिठास और रस के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि 16वीं सदी में शेर शाह सूरी ने इसकी खेती शुरू करवाई थी, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व भी जुड़ गया।
वाराणसी का लंगड़ा आम पकने के बाद भी हरे रंग का ही रहता है, जो इसे बाकी आमों से अलग बनाता है। इसे एक स्थानीय पुजारी के नाम पर यह नाम मिला था। इसका रस और स्वाद इसे बेहद खास बनाते हैं।
गुजरात का केसर आम अपनी हल्की केसरिया खुशबू और शानदार स्वाद के लिए जाना जाता है। आमरस बनाने के लिए यह सबसे पसंदीदा किस्मों में से एक है और हापुस को भी कड़ी टक्कर देता है।
नीलम आम लगभग हर राज्य में उगाया जाता है और यह सीजन के अंत में पकता है। इसी वजह से यह गर्मियों के बाद भी लोगों को आम का स्वाद देता रहता है।
तोतापरी आम अपने अनोखे आकार के लिए जाना जाता है, जो तोते की चोंच जैसा दिखता है। इसका स्वाद ज्यादा मीठा नहीं होता, इसलिए इसे सलाद, अचार और चटनी में खूब इस्तेमाल किया जाता है।