LPG सिलेंडर पर A-24, B-26 जैसे कोड का पूरा सच, जानिए कैसे तय होती है सेफ्टी टेस्टिंग डेट

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें LPG सिलेंडर पर लिखे A, B, C और D कोड का अर्थ बताया गया। ये कोड एक्सपायरी नहीं बल्कि सेफ्टी टेस्टिंग शेड्यूल को दर्शाते हैं। आइए समझते हैं इन कोड्स का सही मतलब और इससे जुड़ी जरूरी सुरक्षा जानकारी आसान भाषा में

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 12:03 PM
LPG सिलेंडर को बहुत मजबूत स्टील से बनाया जाता है

अक्सर जब लोग LPG सिलेंडर पर A-24, B-26 जैसे कोड देखते हैं तो उन्हें लगता है कि यह उसकी एक्सपायरी डेट है और शायद सिलेंडर अब कुछ समय बाद इस्तेमाल के लायक नहीं रहेगा। इसी गलतफहमी की वजह से कई बार डर और भ्रम भी फैल जाता है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दरअसल, यह कोई एक्सपायरी तारीख नहीं होती, बल्कि यह इस बात का संकेत होती है कि उस सिलेंडर की अगली बार सुरक्षा जांच कब की जाएगी।

यानी यह कोड यह सुनिश्चित करने के लिए होता है कि सिलेंडर समय-समय पर टेस्ट होकर पूरी तरह सुरक्षित बना रहे। आसान भाषा में कहें तो यह एक “सेफ्टी रिमाइंडर” की तरह काम करता है, जो बताता है कि सिलेंडर की जांच किस अवधि में होगी, न कि यह कि सिलेंडर खराब होने वाला है या उसे तुरंत बदलना है।

सिलेंडर की मजबूती और निर्माण प्रक्रिया


LPG सिलेंडर को बहुत मजबूत स्टील से बनाया जाता है ताकि वह हाई प्रेशर वाली गैस को लंबे समय तक सुरक्षित रख सके। इसे तैयार करने के लिए सख्त औद्योगिक मानकों का पालन किया जाता है। भारत में इन सिलेंडरों का निर्माण केवल उन्हीं कंपनियों को करने की अनुमति होती है जो BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के नियमों को पूरा करती हैं और जिन्हें CCOE (Chief Controller of Explosives) से मंजूरी मिली होती है। इसका मतलब यह है कि सिलेंडर की क्वालिटी और सुरक्षा पर बहुत कड़ा नियंत्रण रखा जाता है।

सिलेंडर की जांच कब और कैसे होती है

सरकारी नियमों के अनुसार हर LPG सिलेंडर की सुरक्षा समय-समय पर जांची जाती है। नए सिलेंडर को लगभग 10 साल तक इस्तेमाल करने के बाद पहली बार पूरी तरह टेस्ट किया जाता है। इसके बाद हर 5 साल के अंतराल पर उसकी दोबारा जांच और पेंटिंग की जाती है। इस प्रक्रिया में सिलेंडर की दीवारों की मजबूती, जंग, लीकेज और किसी भी तरह की दरार या कमजोरी को बहुत ध्यान से परखा जाता है। अगर सिलेंडर पूरी तरह सुरक्षित पाया जाता है तभी उसे दोबारा गैस भरकर उपयोग में लाया जाता है।

A, B, C, D कोड का आसान मतलब

सिलेंडर पर लिखा A, B, C या D अक्षर यह बताता है कि साल के किस हिस्से में उसकी जांच होनी है। A का मतलब जनवरी से मार्च, B का मतलब अप्रैल से जून, C का मतलब जुलाई से सितंबर और D का मतलब अक्टूबर से दिसंबर होता है। इसके साथ लिखा नंबर यह बताता है कि यह कौन सा साल है। उदाहरण के लिए अगर किसी सिलेंडर पर B-26 लिखा है तो इसका मतलब है कि उसकी जांच अप्रैल से जून 2026 के बीच होनी है। यह कोड एक तरह से समय बताने वाला सिस्टम है जो यह सुनिश्चित करता है कि हर सिलेंडर समय पर जांचा जाए।

गैस प्लांट में सुरक्षा प्रक्रिया

जब खाली LPG सिलेंडर गैस प्लांट में वापस जाते हैं तो उनकी पहले अच्छी तरह जांच की जाती है। जो सिलेंडर अपने निर्धारित समय या टेस्टिंग पीरियड को पूरा कर चुके होते हैं उन्हें अलग रख दिया जाता है। उनकी पूरी तकनीकी जांच की जाती है और अगर वे सुरक्षित पाए जाते हैं तो उन्हें फिर से पेंट करके और भरकर बाजार में भेज दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया इसलिए की जाती है ताकि किसी भी तरह का खतरा उपभोक्ता तक न पहुंचे।

टेस्टिंग क्यों जरूरी है

LPG सिलेंडर में गैस बहुत अधिक दबाव में भरी होती है, इसलिए उसका सुरक्षित होना बहुत जरूरी है। समय-समय पर जांच से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सिलेंडर में कहीं लीकेज, जंग या कोई कमजोरी तो नहीं है। अगर ऐसी कोई समस्या होती है तो उसे पहले ही पकड़ लिया जाता है, जिससे किसी भी दुर्घटना की संभावना बहुत कम हो जाती है।

चर्चा में क्यों आया यह विषय

हाल के समय में LPG सिलेंडर कई वजहों से चर्चा में आया है। कुछ जगहों पर गैस सप्लाई को लेकर अफवाहें फैलीं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर A-24 जैसे कोड का गलत मतलब फैलने लगा, जहां लोग इसे एक्सपायरी डेट समझने लगे। इसी तरह कुछ लोग गैस की संभावित कमी को देखकर इंडक्शन कुकटॉप जैसे विकल्पों की ओर भी देखने लगे। इन सभी कारणों से यह विषय अचानक काफी चर्चा में आ गया।

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