गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में तरह-तरह के फलों की बहार आ जाती है, लेकिन इन सबमें सबसे ज्यादा इंतजार जिस फल का किया जाता है, वो है आम। इसे फलों का राजा कहा जाता है और इसका स्वाद हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींच लेता है। आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि गर्मियों की पहचान भी माना जाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वादिष्ट चटनी, शेक, जूस, आचार और कई तरह के व्यंजन भी बनाए जाते हैं।
दुनिया भर में आम की 1500 से ज्यादा किस्में पाई जाती हैं, जबकि भारत में ही इसकी लगभग 1000 वैरायटी मौजूद हैं। हर किस्म का अपना अलग स्वाद, रंग, खुशबू और पहचान होती है। यही वजह है कि आम को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिलता है और यह गर्मियों का सबसे लोकप्रिय फल बन जाता है।
तोतापरी आम अपने नाम की तरह ही अनोखा होता है, जिसकी आकृति तोते जैसी दिखती है। यह पकने के बाद भी हरा-पीला रंग लिए रहता है। ये आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में ज्यादा मिलता है। स्वाद में ये ज्यादा मीठा नहीं होता, लेकिन चटनी, अचार और सलाद के लिए बेहतरीन माना जाता है।
हापुस यानी अल्फांसो आम महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में पाया जाता है। इसे दुनिया की सबसे महंगी और प्रीमियम किस्मों में गिना जाता है। इसमें रेशे नहीं होते और इसका केसरिया रंग व खुशबू इसे खास बनाते हैं। यही वजह है कि ये विदेशों में भी खूब एक्सपोर्ट किया जाता है।
सिंधूरा आम अपने स्वाद के लिए जाना जाता है, जिसमें हल्की मिठास के साथ खटास भी होती है। इसका रंग लाल-हरा होता है और यह शेक और ड्रिंक्स के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।
चौसा आम उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है, खासकर बिहार में। माना जाता है कि इसे शेर शाह सूरी के समय में प्रसिद्धि मिली थी। ये मानसून के मौसम में ज्यादा मिलता है और अपने मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है।
बीजू आम झारखंड की खास पहचान है। यह छोटे आकार का होता है लेकिन बेहद रसदार और मीठा होता है। इसमें रेशे भी पाए जाते हैं, जिससे इसका स्वाद और टेक्सचर अलग हो जाता है। इसका इस्तेमाल अचार और अमचूर बनाने में भी किया जाता है।
केसर आम गुजरात का मशहूर और प्रीमियम आम है, जिसे इसकी केसर जैसी खुशबू के कारण यह नाम मिला। इसकी खेती की शुरुआत 1930 के आसपास मानी जाती है। यह स्वाद और सुगंध दोनों में बेहद खास माना जाता है।
लंगड़ा आम बनारस और उत्तर प्रदेश में काफी फेमस है। यह पकने के बाद भी हरा रहता है और जुलाई-अगस्त में खूब मिलता है। इसका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है।
मालदा आम बिहार में “आमों का राजा” भी कहा जाता है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है और ये चटनी व अन्य पारंपरिक व्यंजनों में खूब इस्तेमाल होता है।
सफेदा आम को बंगनपल्ली भी कहा जाता है, जिसकी शुरुआत आंध्र प्रदेश से हुई। इसका रंग हल्का हरा-पीला होता है और यह लंबे आकार में मिलता है। इसमें रेशे ज्यादा होते हैं लेकिन स्वाद अच्छा माना जाता है।
बादामी आम को कर्नाटक का “अल्फांसो” भी कहा जाता है। यह खासतौर पर जूस और शेक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और अपने मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है।