One District One Cuisine: अमरोहा के आमों का 'शाही जायका', जानें इससे बनने वाले पारंपरिक व्यंजन और इसकी अनूठी दास्तान

One District One Cuisine: उत्तर प्रदेश की 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC) योजना के तहत अमरोहा (Amroha) का नाम आते ही जुबान पर वहां के रसीले और खुशबूदार आमों का स्वाद आ जाता है। अमरोहा के आम न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान रखते हैं।

अपडेटेड May 20, 2026 पर 7:00 AM
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उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जनपद एक व्यंजन' (One District One Cuisine) योजना प्रदेश के पारंपरिक स्वादों को नया आसमान दे रही है। इस कड़ी में ढोलक और संगीत के वाद्य यंत्रों के लिए मशहूर अमरोहा जिला अब अपने 'आम' और उससे बनने वाले अनूठे व्यंजनों के लिए दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहा है। अमरोहा के बागों के आमों की मिठास ऐसी है कि एक बार जो इसे चख ले, वह इसका मुरीद हो जाता है।

योगी सरकार की इस पहल से अब अमरोहा के आम आधारित उत्पादों (Mango-based products) को बड़े पैमाने पर ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और वैश्विक बाजार मिलने जा रहा है।

अमरोहा के आमों का गौरवशाली इतिहास


अमरोहा में आम की बागवानी का इतिहास सदियों पुराना है। मुगल काल और उसके बाद के दौर में यहां के नवाबों और जमींदारों ने आम की ऐसी किस्में विकसित कीं, जो अपनी बनावट, खुशबू और स्वाद में बेजोड़ हैं। अमरोहा का 'रटौल', 'चौंसा', 'दशहरी', और 'लंगड़ा' आम बेहद लोकप्रिय हैं। यहां की मिट्टी और जलवायु आम की पैदावार के लिए इतनी अनुकूल है कि यहां के आमों में एक प्राकृतिक सोंधापन और बेहिसाब मिठास होती है।

अमरोहा की रसोई से

अमरोहा में आम सिर्फ एक फल नहीं है, बल्कि यह यहां की संस्कृति और खानपान का अहम हिस्सा है। गर्मियों के मौसम में यहां के हर घर में आम से कई तरह के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं:

1. अमरोहा का प्रसिद्ध 'आम का अचार' (Amroha's Heritage Mango Pickle)

अमरोहा के कच्चे आमों (कैरी) से बनने वाला पारंपरिक अचार अपनी लंबी शेल्फ-लाइफ और खास मसालों के लिए जाना जाता है। यहां की महिलाएं पीढ़ियों पुरानी रेसिपी से सरसों के तेल, सौंफ, कलौंजी और हींग के मेल से ऐसा अचार तैयार करती हैं, जिसकी मांग दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में रहती है। ODOC के तहत इस अचार को अब कमर्शियल लेवल पर प्रमोट किया जा रहा है।

2. कच्चे आम की 'खट्टी-मीठी लांजी' (Gurumma / Launji)

अमरोहा के ग्रामीण और शहरी इलाकों में गर्मियों में 'गुरम्मा' या 'लांजी' बेहद चाव से खाई जाती है। कच्चे आम के टुकड़ों को गुड़ या चीनी, सौंफ, और कलौंजी के साथ पकाकर गाढ़ा जेली जैसा बनाया जाता है। यह न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि लू और गर्मी से भी बचाती है।

3. 'आम का पन्ना' (Am Panna)

चिलचिलाती धूप और गर्मी से राहत पाने के लिए अमरोहा का पारंपरिक 'आम पन्ना' हर नुक्कड़ और घर में नजर आता है। कच्चे आम को भूनकर या उबालकर, उसमें पुदीना, भुना जीरा, काला नमक और मिश्री मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। यह एक बेहतरीन देसी समर ड्रिंक है।

4. 'आम की खीर' और 'मैंगो फिरनी' (Mango Kheer)

नवाबी संस्कृति के प्रभाव वाले इस जिले में पके हुए चौंसा या दशहरी आम के पल्प (गुदे) को गाढ़े दूध, चावल और ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर 'मैंगो फिरनी' या खीर बनाई जाती है। यह अमरोहा के दावतों की जान होती है।

ODOC से कैसे बदलेगी अमरोहा के आमों की तकदीर?

अब तक अमरोहा का आम सीजनल फल के रूप में ही बाजारों तक सीमित रहता था, जिससे बागवानों को सही कीमत नहीं मिल पाती थी। लेकिन ODOC योजना के आने से कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं:

* फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स: सरकार के सहयोग से जिले में मैंगो पल्प प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाई जा रही हैं, जिससे आम के सीजन के बाद भी 'मैंगो शेक', 'मुरब्बा', 'जेली' और 'अमचूर पाउडर' का उत्पादन साल भर हो सकेगा।

* अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग: रामपुर के हापसी हलवे की तरह ही अमरोहा के आम के उत्पादों को आकर्षक और सुरक्षित पैकेजिंग दी जाएगी, जिससे ये विदेशों के सुपरमार्केट्स तक पहुंच सकें।

* किसानों की आय में बढ़ोतरी: बिचौलियों के खत्म होने और सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ने के कारण अमरोहा के आम उत्पादकों और बागवानों को अपनी फसल का दोगुना दाम मिल सकेगा।

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