सलमान की पोस्ट से Loneliness यानी अकेलेपन पर शुरू हुई बहस, हर घंटे ये लेता है 100 जान! कैसे बचें इससे?

Loneliness: सलमान खान की सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई बहस के बाद यह बात सामने आई है कि 'अकेलापन' अब एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिससे दुनिया भर में हर साल करीब 8.71 लाख लोगों (यानी हर घंटे लगभग 100 लोग) की जान जा रही है।

अपडेटेड May 19, 2026 पर 11:52 AM
Story continues below Advertisement

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बेहद विचारोत्तेजक पोस्ट साझा की। उन्होंने अपनी एक तस्वीर के साथ लिखा "अकेले होने के दो तरीके होते हैं; 'अलोन' होना आपकी खुद की पसंद है, लेकिन 'लोनली' (अकेलापन) तब होता है जब कोई आपके साथ नहीं रहना चाहता।" हालांकि, बाद में सलमान ने साफ किया कि इस पोस्ट का उनके निजी जीवन या मानसिक स्थिति से कोई संबंध नहीं था, लेकिन तब तक इंटरनेट पर एक गंभीर बहस छिड़ चुकी थी। यह बहस थी 'लोन loneliness' यानी अकेलेपन की, जो आज के दौर की सबसे बड़ी और अदृश्य महामारी बन चुका है।

आंकड़े जो होश उड़ा दें: हर घंटे 100 मौतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में सामाजिक अलगाव और अकेलापन हर साल लगभग 8,71,000 लोगों की मौत का कारण बनता है। अगर इसे सीधे शब्दों में समझें, तो हर घंटे लगभग 100 लोग अकेलेपन के दुष्प्रभावों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह खतरा वायु प्रदूषण, धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन जितना ही जानलेवा है।


अजीब विरोधाभास यह है कि आज का युवा वर्ग, जो चौबीसों घंटे सोशल मीडिया, रील्स और ग्रुप चैट्स के जरिए पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है, वही सबसे ज्यादा अकेला है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, 13 से 17 साल के लगभग 21% किशोर और 18 से 29 साल के 17.4% युवा गंभीर अकेलेपन का शिकार हैं।

सिर्फ मानसिक उदासी नहीं, शरीर को भी तोड़ता है अकेलापन

अकेलेपन को अक्सर लोग सिर्फ मन का एक वहम या उदासी समझ लेते हैं, लेकिन विज्ञान कहता है कि यह हमारे शरीर पर सीधा और घातक हमला करता है। लंबे समय तक अकेले रहने से:

* दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।

* यह डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और टाइप-2 डायबिटीज को न्योता देता है।

* शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे मानसिक तनाव के साथ-साथ शारीरिक बीमारियां भी घेर लेती हैं।

इस 'साइलेंट किलर' से खुद को कैसे बचाएं?

तकनीक के इस दौर में जब हम 'डिजिटल रूप से बेहद करीब' और 'वास्तविकता में बेहद दूर' हो चुके हैं, खुद को अकेलेपन से बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप ये व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं:

1. डिजिटल दुनिया से बाहर निकलें (Digital Detox): सोशल मीडिया पर 500 दोस्त होने से बेहतर है कि असल जिंदगी में 2 ऐसे दोस्त हों जिनसे आप अपनी हर बात साझा कर सकें। फोन स्क्रीन का समय घटाएं और लोगों से आमने-सामने मिलें।

2. कम्युनिटी का हिस्सा बनें: अपनी पसंद की हॉबी क्लास ज्वाइन करें, जैसे— योग, डांस, पेंटिंग या कोई खेल। जब आप समान रुचि वाले लोगों से मिलते हैं, तो अकेलापन स्वतः कम होने लगता है।

3. रोजमर्रा की बातचीत बढ़ाएं: सुबह की सैर पर जाते समय पड़ोसियों को मुस्कुराकर ग्रीट करें, सब्जी वाले या कूरियर बॉय से दो दोस्ताना शब्द बोलें। ये छोटे-छोटे मानवीय जुड़ाव आपके मस्तिष्क में सकारात्मक हार्मोन रिलीज करते हैं।

4. मदद मांगने में न हिचकिचाएं: अगर अकेलापन डिप्रेशन या एंग्जायटी का रूप ले रहा हो, तो किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर की मदद लेने में संकोच न करें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।