गांवों और जंगलों के पास रहने वालों के लिए सांपों का खतरा हमेशा बना रहता है। बारिश हो या सूखा, ये रेंगते जीव अचानक घरों में घुस आते हैं और कई बार तो ऐसी घटनाएं जानलेवा भी साबित होती हैं। ऐसे में जहां एक ओर सावधानी और प्राथमिक चिकित्सा जरूरी है, वहीं दूसरी ओर हमारे पारंपरिक आयुर्वेद में भी कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताए गए हैं जो मददगार साबित हो सकते हैं। खासकर एक देसी सब्जी—कंटोला, जिसे कुछ लोग ककोड़ा भी कहते हैं—के बारे में कहा जाता है कि यह सांप के काटने के असर को कम कर सकती है।
सुनने में भले ही ये अजीब लगे, लेकिन सदियों से आदिवासी इलाकों में इस सब्जी को ‘नेचुरल एंटीवेनम’ माना जाता रहा है। ये दावा विज्ञान से ज्यादा लोकविश्वास पर आधारित है, लेकिन इसके पीछे की परंपरा आज भी कई लोगों को चौंकाती है और सोचने पर मजबूर कर देती है।
आयुर्वेद के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सांप ने काटा है और तुरंत उसका इलाज न मिले, तो कंटोला के पौधे की जड़ एक प्राचीन वैकल्पिक उपाय बन सकती है। माना जाता है कि इसके जड़ से बना चूर्ण, विष के प्रभाव को सीमित करने में मदद कर सकता है। इसका प्रयोग एंटी-वेनम (anti-venom) की तरह किया गया है।
एक अध्ययन के अनुसार, कंटोला के पौधे की जड़ से बनी हर्बल दवाएं विष के फैलाव को रोकने में सक्षम हो सकती हैं। विशेषकर उस स्थिति में जब काटे जाने के बाद तुरंत उपयोग किया जाए। कंटोला नमी और गर्म वातावरण में उगता है और इसमें प्रोटीन सहित कई औषधीय तत्व पाए जाते हैं। इसे न केवल सांपों के विष बल्कि अन्य जहरीले कीड़ों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
कैसे करें ककोड़ा की जड़ का इस्तेमाल?
जड़ का चूर्ण बनाएं – पहले कंटोला की बेल की जड़ को धूप में सुखाएं।
दूध के साथ दें – इस जड़ के चूर्ण को थोड़े दूध में मिलाकर रोगी को पिलाएं।
घाव पर लेप करें – जहां सांप ने काटा है, उस जगह पर इस चूर्ण का लेप कर दें।
ताजा पत्तियों का रस दें – इसकी पत्तियों से निकला अर्क भी विष के असर को घटा सकता है।
याद रखें, यह उपाय प्राथमिक सहायता के तौर पर है। सांप के काटने के तुरंत बाद डॉक्टर को दिखाना सबसे जरूरी कदम है। कंटोला का इस्तेमाल केवल उस समय तक किया जा सकता है जब तक चिकित्सा मदद उपलब्ध न हो।