अगर आपने कभी ऑफिस का माहौल देखा है, तो आपने जरूर महसूस किया होगा कि महिलाएं अक्सर शॉल, जैकेट या स्कार्फ ओढ़कर बैठती हैं, जबकि पुरुष हाफ-स्लीव शर्ट या टी-शर्ट में आराम से काम कर रहे होते हैं। यह सिर्फ इसलिए नहीं कि महिलाएं ज्यादा संवेदनशील हैं, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। ऑफिस में एसी का तापमान अक्सर पुरुष कर्मचारियों की सुविधा के अनुसार सेट किया जाता है, जिससे महिलाओं को ठंड महसूस होती है।
महिलाओं का शरीर पुरुषों की तुलना में ऊर्जा (एनर्जी) कम जलाता है, यानी मेटाबॉलिज्म धीमा होता है। मसल्स पुरुषों की तरह गर्मी पैदा नहीं कर पाती, और शरीर के नीचे जमा फैट गर्मी को बनाए रखने की बजाय ठंड का एहसास बढ़ा देता है। इसके अलावा, हार्मोनल बदलाव जैसे पीरियड्स के दौरान शरीर का तापमान बदलता रहता है, जिससे महिलाएं और जल्दी ठंड महसूस करती हैं। यही वजह है कि ऑफिस के एसी वाले कमरे में महिलाएं अक्सर अधिक कपड़े पहनकर ही आराम महसूस कर पाती हैं।
ऑफिस का तापमान और खींचतान
ऑफिस में एसी का तापमान तय करने में अक्सर पुरुषों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाती है। 1960 के दशक में किए गए अध्ययन के अनुसार, औसत ऑफिस का तापमान 40 साल के पुरुष के मेटाबॉलिज्म के हिसाब से सेट किया गया था। महिलाओं को इसके मुकाबले लगभग 35% ज्यादा गर्मी की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें ठंड अधिक लगती है। इस असमानता की वजह से ऑफिस में हल्की खींचतान होना आम है—पुरुष ठंड बढ़ाना चाहते हैं, जबकि महिलाएं कम करना चाहती हैं। यह सिर्फ पसंद का सवाल नहीं है, बल्कि शरीर के काम करने के तरीके और वैज्ञानिक कारण हैं।
ऑफिस में संतुलित तापमान रखना जरूरी है। कुछ ऑफिसों ने अब ऐसा तरीका अपनाया है कि एसी का तापमान ऐसा हो जो दोनों लिंगों के लिए आरामदायक हो। इसके अलावा, महिलाएं अपने लिए शॉल या जैकेट रख सकती हैं, और पुरुष भी थर्मल या हल्का स्वेटर इस्तेमाल कर सकते हैं। छोटे-छोटे बदलाव जैसे व्यक्तिगत पंखे, एयर पर्सनलाइजेशन, या सीट की लोकेशन बदलना भी मदद कर सकता है।