One District One Cuisine: फर्रुखाबाद की दालमोठ नवाबों के दौर का है वो चटपटा स्वाद, जो आज भी है सबकी पहली पसंद... जानिए इसका इतिहास
One District One Cuisine: चलिए अब आपको उत्तर प्रदेश के एक और ऐतिहासिक शहर फर्रुखाबाद ले चलते हैं। गंगा के किनारे बसे इस शहर की सुबह और शाम जिस जायके के बिना अधूरी है, वह है यहां की मशहूर 'दालमोठ'। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन' (ODOC) के तहत फर्रुखाबाद की दालमोठ को अब दुनिया भर में नई पहचान दी जा रही है। आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक कहानी और इसे घर पर तैयार करने की विधि।
उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जिला न केवल अपनी 'जरदोजी' और 'ब्लॉक प्रिंटिंग' के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि खान-पान की दुनिया में यहां की दालमोठ का कोई सानी नहीं है। यह नमकीन इतनी मशहूर है कि फर्रुखाबाद आने वाला हर व्यक्ति अपने साथ इस दालमोठ का डिब्बा ले जाना नहीं भूलता। हाल ही में इसे प्रदेश सरकार की ODOC योजना में शामिल किया गया है, जिससे इसके स्थानीय निर्माताओं को नई तकनीक और ब्रांडिंग का लाभ मिल सकेगा।
फर्रुखाबाद की दालमोठ का इतिहास
फर्रुखाबाद की स्थापना 1714 में नवाब मोहम्मद खान बंगश ने की थी। कहा जाता है कि नवाबों के दौर में शाही शाम की महफिलों में मेवों और मसालों से युक्त कुछ हल्का और चटपटा खाने का रिवाज था। शाही रसोइयों ने काली साबुत मसूर की दाल को तलकर और उसमें गुप्त मसालों का मिश्रण तैयार करके एक ऐसी नमकीन बनाई जो लंबे समय तक खराब न हो।
धीरे-धीरे यह शाही रसोई से निकलकर शहर की गलियों तक पहुंची। फर्रुखाबाद की आबोहवा और यहां के कारीगरों के हाथों का हुनर कुछ ऐसा है कि यहां की दालमोठ का स्वाद अन्य शहरों की नमकीन से बिल्कुल अलग होता है। आज यह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी उतनी ही लोकप्रिय है।
क्यों खास है फर्रुखाबाद की दालमोठ?
फर्रुखाबाद की दालमोठ की सबसे बड़ी विशेषता इसका कड़कपन (Crunch) और संतुलित तीखापन है। इसमें इस्तेमाल होने वाली काली मसूर की दाल को विशेष तरीके से भिगोया और सुखाया जाता है। इसके अलावा:
*इसमें देसी घी का प्रयोग इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है।
* मसालों में अमचूर, काली मिर्च और सोंठ का जो अनुपात रखा जाता है, वह इसे पाचक भी बनाता है।
* इसमें मिलाए जाने वाले खरबूजे के बीज और काजू इसे एक प्रीमियम और शाही लुक देते हैं।
* शाही टच के लिए: 1/2 कप तले हुए काजू, 2 चम्मच खरबूजे के बीज, और बारीक वाले बेसन के सेव (भुजिया)।
बनाने की विधि (Step-by-Step Guide):
स्टेप 1: दाल को तैयार करना
सबसे पहले काली मसूर की दाल को साफ करके अच्छी तरह धो लें। अब इसमें एक चौथाई चम्मच बेकिंग सोडा डालकर पर्याप्त पानी में 12 से 15 घंटे के लिए भिगो दें। सोडा दाल को अंदर से खस्ता बनाने में मदद करता है।
स्टेप 2: सुखाना
भीगी हुई दाल का पानी छान लें और इसे एक सूती कपड़े पर फैलाकर पंखे की हवा में 2-3 घंटे के लिए सुखाएं। ध्यान रहे कि दाल की ऊपरी सतह का पानी पूरी तरह सूख जाना चाहिए, लेकिन दाल के अंदर नमी बनी रहनी चाहिए।
स्टेप 3: तलने की प्रक्रिया
कढ़ाई में घी या तेल गर्म करें। जब तेल खूब गर्म हो जाए, तो एक छलनी में थोड़ी-थोड़ी दाल लेकर उसे तेल में डुबोएं। इसे मध्यम-तेज आंच पर तब तक तलें जब तक कि दाल तेल के ऊपर न तैरने लगे और कुरकुरी न हो जाए। दाल को निकालकर टिश्यू पेपर पर रखें।
स्टेप 4: मेवा और मसाला मिलाना
इसी तरह काजू और खरबूजे के बीजों को भी हल्का सुनहरा होने तक तल लें। अब एक बड़े बर्तन में तली हुई दाल, काजू और खरबूजे के बीज डालें। इसमें ऊपर से तैयार किया हुआ मसाला मिश्रण (लाल मिर्च, अमचूर, काला नमक, जीरा पाउडर) गरमा-गरम दाल में ही मिलाएं ताकि मसाला चिपक जाए।
स्टेप 5: फाइनल टच
अंत में इसमें बारीक बेसन के सेव (महीन भुजिया) मिलाएं। तैयार है आपकी फर्रुखाबाद की मशहूर दालमोठ।
प्रो टिप: फर्रुखाबाद के स्थानीय लोग दालमोठ को केवल चाय के साथ ही नहीं खाते, बल्कि इसे बारीक कटे प्याज, हरी मिर्च और नींबू का रस डालकर 'दालमोठ चाट' की तरह भी सर्व करते हैं। इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर आप 1 महीने तक ताज़ा रख सकते हैं।