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One District One Cuisine: झांसी का 'दाल-बाफला' है बुंदेलखंडी विरासत का वो स्वाद जिसके आगे शाही दावतें भी फीकी पड़ जाएं! जानिए इसका इतिहास

One District One Cuisine: झांसी का दाल-बाफला बुंदेलखंडी खान-पान की एक शाही विरासत है, जिसे उबालने के बाद कंडों की आंच पर सेंक कर और शुद्ध देसी घी में डुबोकर तैयार किया जाता है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड May 14, 2026 पर 7:00 AM
One District One Cuisine: झांसी का 'दाल-बाफला' है  बुंदेलखंडी विरासत का वो स्वाद जिसके आगे शाही दावतें भी फीकी पड़ जाएं! जानिए इसका इतिहास

झांसी, जो अपनी वीरता और इतिहास के लिए विश्व प्रसिद्ध है, स्वाद के मामले में भी किसी से पीछे नहीं है। यहां के खान-पान में मिट्टी की सौंधी खुशबू और शुद्धता की झलक मिलती है। झांसी और उसके आसपास के इलाकों में 'दाल-बाफला' केवल एक भोजन नहीं, बल्कि मेहमाननवाजी का प्रतीक है। हालांकि बाफला का मूल नाता मालवा क्षेत्र से भी जोड़ा जाता है, लेकिन झांसी ने इसे अपने मसालों और देसी घी के तड़के के साथ एक अनूठा 'बुंदेलखंडी ट्विस्ट' दिया है।

क्या है दाल-बाफला की खासियत?

बाफला, राजस्थान की 'बाटी' से थोड़ा अलग होता है। जहां बाटी को सीधे आग पर सेका जाता है, वहीं बाफले को पहले हल्दी और नमक वाले पानी में उबाला जाता है और फिर कंडों (उपलों) की आंच पर सेंका जाता है। उबालने की इस प्रक्रिया के कारण बाफला अंदर से रुई जैसा नरम और बाहर से बेहद कुरकुरा होता है। जब इसे फोड़कर शुद्ध देसी घी के कटोरे में डुबोया जाता है, तो इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।

इसके साथ परोसी जाने वाली 'पंचमेल दाल' इसे मुकम्मल बनाती है। मूंग, चना, अरहर, मसूर और उड़द की दालों का मिश्रण, जिसमें हींग और सूखी लाल मिर्च का कड़क तड़का लगा हो, बाफले के साथ मिलकर एक जबरदस्त जुगलबंदी बनाता है।

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