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क्या बचपन के दोस्तों से आज भी है अटैचमेंट? साइकोलॉजी ने बताया- ऐसे लोग वफादारी और रिश्तों में होते हैं बिल्कुल अलग!

बचपन की दोस्ती सिर्फ पुरानी यादों की वजह से खास नहीं होती, बल्कि इसमें भरोसा और वफादारी भी बहुत मायने रखती है। पुराने दोस्त हमें उस समय से जानते हैं, जब वह हमारे जैसे थे, और जिंदगी में बदलाव आने के बाद भी हमारा साथ देते हैं। रिसर्च कहती है बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ इसकी समझ और बढ़ती जाती है। दोस्ती हमें सिखाती है कि सच्चा दोस्त वही है, जो मुश्किल समय में भी हमारा साथ दे।

Roopali Sharmaअपडेटेड Aug 26, 2026 पर 7:00 AM
क्या बचपन के दोस्तों से आज भी है अटैचमेंट? साइकोलॉजी ने बताया- ऐसे लोग वफादारी और रिश्तों में होते हैं बिल्कुल अलग!

बचपन की दोस्ती का रिश्ता बहुत खास होता है। बचपन के दोस्त हमारे साथ तब से होते हैं, जब हमें रिश्तों की समझ नहीं होती है। साथ खेलना, स्कूल जाना, छोटी-छोटी बातों पर लड़ना और फिर कुछ ही देर में दोबारा दोस्त बन जाना, ये यादें बड़े होने के बाद भी हमारे साथ रहती हैं।

समय के साथ जिंदगी बदल जाती है। पढ़ाई, नौकरी, शादी और दूसरी जिम्मेदारियों की वजह से दोस्त अलग-अलग शहरों में चले जाते हैं और बातचीत भी कम हो सकती है। इसके बावजूद अगर दोस्ती सालों तक बनी रहती है, तो इसके पीछे सिर्फ पुरानी यादें नहीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए अपनापन की भावना भी होती है।

 

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