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बीमारी में भी काम करने की मजबूरी या आदत? जानिए दिमाग पर इसका असर

बीमार होने पर भी काम करते रहना कई लोगों के लिए सामान्य आदत बन जाती है। उन्हें लगता है कि छुट्टी लेने से काम बढ़ जाएगा, टीम पर असर पड़ेगा या उनकी जिम्मेदारियां अधूरी रह जाएंगी। लेकिन साइकोलॉजी के अनुसार इसके पीछे सिर्फ मेहनत या जिम्मेदारी की भावना नहीं, बल्कि काम का प्रेशर, नौकरी को लेकर चिंता और ऑफिस का माहौल भी कारण हो सकता है।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 16, 2026 पर 4:12 PM
बीमारी में भी काम करने की मजबूरी या आदत? जानिए दिमाग पर इसका असर

क्या आपने कभी तेज सिरदर्द, थकान या तबीयत खराब होने के बावजूद सिर्फ इसलिए काम किया है क्योंकि छुट्टी लेने का मन नहीं हुआ? कई लोग आराम की जरूरत महसूस करने के बाद भी लैपटॉप खोल लेते हैं और काम पूरा करने में लग जाते हैं। उन्हें लगता है कि थोड़ा और काम कर लेने के बाद आराम कर लेंगे, लेकिन यही सोच कई बार उन्हें लगातार काम और प्रेशर के एक ऐसे चक्र में ले जाती है, जिसे वे खुद भी आसानी से पहचान नहीं पाते। साइकोलॉजी में इस बिहेवियर को एक खास नाम दिया गया है और इसके पीछे कई दिलचस्प कारण बताए जाते हैं।

बीमारी में भी काम करने के कारण

बीमार होने के बावजूद काम करते रहने का कारण हर किसी के लिए अलग हो सकता है। किसी को अपना काम पसंद होता है और उसे लगता है कि थोड़ा काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। वहीं कोई इस डर से काम करता रह सकता है कि छुट्टी लेने पर काम जमा हो जाएगा, बॉस नाराज हो सकते हैं या टीम में उसकी छवि खराब हो सकती है। रिसर्च में काम का ज्यादा बोझ, स्ट्रेस, जॉब इनसिक्योरिटी, कम सपोर्ट और छुट्टी लेने से जुड़ा प्रेशर जैसे कई कारण सामने आए हैं।

लोगों में काम का बढ़ता प्रेशर

कई लोगों के मन में यह सोच चलती रहती है कि पहले जरूरी काम निपटा लेते हैं, फिर आराम करेंगे। उन्हें लगता है कि आज छुट्टी लेने से ईमेल बढ़ जाएंगे, डेडलाइन छूट सकती है या वापस आने पर काम और ज्यादा मिल जाएगा। इस तरह छुट्टी लेना उन्हें आराम के बजाय एक नई परेशानी जैसा लगने लगता है। नतीजा यह होता है कि शरीर आराम मांग रहा होता है, लेकिन दिमाग काम अधूरा छोड़ने को लेकर परेशान रहता है।

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