उम्र के साथ-साथ बालों का पतला होना और सफेद होना आम बात है। जब शरीर को सही पोषण नहीं मिलता, तो उसका असर सीधे बालों पर दिखने लगता है। 40 साल की उम्र के बाद बाल अपने आप बदलने लगते हैं। बाल पतले हो जाते हैं, घनापन कम हो जाता है और उनका टेक्सचर कभी रूखा तो कभी ज्यादा घुंघराला लगने लगता है। सफेद या हल्के पीले बाल ज्यादा दिखने लगते हैं। वहीं 40 के बाद हम अपने हेयरकट पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। अक्सर चेहरे को बूढ़ा दिखाने की वजह सफेद बाल नहीं, बल्कि ऐसा हेयरकट होता है जो फीका और बेजान लगता है। जब बाल चेहरे से चिपके हों, सीधे नीचे गिरते हों या बहुत टाइट तरीके से चेहरे को घेर लें, तो उम्र ज्यादा दिखने लगती है।
40 के बाद स्टाइलिश और जवां दिखने के लिए बाल बहुत छोटे रखना जरूरी नहीं होता। असली फर्क तब पड़ता है जब चेहरे के आसपास हल्की मूवमेंट, नरम लुक और ऐसा स्टाइल जो रोशनी को अच्छे से पकड़ सके। 40 की उम्र के बाद हल्की लेयरिंग, साइड पार्ट या तिरछी फ्रिंज बालों में हलचल लाती है। जब बालों में मूवमेंट होता है तो नजरें बालों के बहाव पर टिकती हैं। यही वजह है कि हल्के साइड फ्रिंज वाला लेयर्ड बॉब, पीछे खींचे गए बहुत लंबे बालों से ज्यादा फ्रेश और मॉडर्न लगता है।
40 की उम्र के बाद एक आसान लेकिन जरूरी बात यह है कि बालों की जड़ों को थोड़ा उठाव दिया जाए, रंग बहुत गहरा न रखा जाए और बालों का टेक्सचर नरम रखा जाए। पतले बालों को लंबा रखने से ज्यादा फायदा नहीं होता, उन्हें हल्की हवा और उछाल चाहिए होता है। बाल सुखाते समय गोल ब्रश से जड़ों को हल्का ऊपर उठाने पर बाल अपने आप भरे-भरे लगने लगते हैं। सिर के ऊपर वाले हिस्से में हल्की लेयर्स रखने से भी अच्छा वॉल्यूम आता है। साथ ही, बिल्कुल सीधा बीच का पार्ट छोड़कर हल्का साइड पार्ट रखने से बाल ज्यादा घने और फ्रेश दिखते हैं।
40 की उम्र के बाद सही फ्रिंज चेहरे का लुक काफी बदल सकती है। बहुत भारी और सीधी फ्रिंज, जो माथे पर कड़ी लाइन बनाती है, अक्सर उम्र ज्यादा दिखाती है। इसके बजाय हल्की, सॉफ्ट और थोड़ी लेयर वाली फ्रिंज बेहतर रहती है। जो फ्रिंज भौंहों को हल्का छूती हो या साइड में गिरती हो, वह चेहरे की झुर्रियों को कम उभारती है, पतली होती हेयरलाइन को छिपाती है और ध्यान आंखों पर ले आती है।
चेहरे के पास गिरने वाली कुछ पतली लटें भी लुक में बड़ा बदलाव ला देती हैं। दो-तीन हल्की रंग की लटें जो गालों के पास आती हैं, चेहरे के फीचर्स को बहुत सॉफ्ट तरीके से उभारती हैं, बिना मेकअप के भारी कंटूर के। जब बाल पीछे बंधे हों, तब भी ये लटें लुक को ज्यादा सख्त नहीं होने देतीं। और जब बाल खुले हों, तो यही स्ट्रैंड्स चेहरे की सीधी लाइनों को तोड़कर एक हल्की-सी फ्रेश और नेचुरल एलिगेंस ले आती हैं।