आजकल हर काम के लिए अलग कपड़े पहने जाते हैं, लेकिन भारतीय महिलाएं काफी समय से साड़ी को अपनी जरूरत के हिसाब से पहनती आ रही हैं। साड़ी को ऐसे कई तरीकों से पहना जाता था, जिससे चलना-फिरना और रोज के काम करना आसान रहे। इसलिए साड़ी को सिर्फ ट्रेडिशनल कपड़ा ही नहीं, बल्कि भारत का पुराना और काम का फैशन भी कहा जा सकता है।
नौवारी ड्रेप
महाराष्ट्र की नौवारी साड़ी नौ गज लंबी होती है और इसे धोती की तरह पहना जाता है। इसके नीचे वाले भाग को पैरों के बीच से निकालकर पीछे कमर में खोंसा जाता है, जिससे पैरों को खुलकर चलाने और काम करने में आसानी होती है।
कूर्ग-स्टाइल ड्रेपिंग
कोडावा साड़ी का कूर्ग-स्टाइल ड्रेप पहाड़ी लाइफस्टाइल को ध्यान में रखकर डेवेलप हुआ माना जाता है। इसमें प्लीट्स पीछे और पल्लू दाहिने कंधे पर रहता है, जिससे साड़ी शरीर के करीब रहती है और चलना-फिरना आसान होता है।
मडिसार ड्रेप
मडिसार तमिलनाडु में साड़ी पहनने का ट्रेडिशनल तरीका है, जिसमें नौ गज की साड़ी को पैरों के बीच से लपेटकर धोती जैसा शेप दिया जाता है। इस तरह साड़ी संभालना आसान होता है और चलने-फिरने में भी परेशानी कम होती है।
मेखला चादर ड्रेप
असम की मेखला चादर साड़ी से अलग ट्रेडिशनल आउटफिट है, जिसमें नीचे मेखला और ऊपर चादर पहनी जाती है। इसका अलग निचला हिस्सा पैरों के आसपास कपड़ा संभालने की परेशानी कम करता है और चलने में आसानी देता है।
बंगाली ड्रेप
बंगाली स्टाइल में ड्रेप ट्रेडिशनल लुक देने के साथ साड़ी को संभालने में भी आसान बनाता है। यह साड़ी को चौड़ी प्लीट्स के साथ पहना जाता है और पल्लू को दोनों कंधों पर अलग अंदाज में रखा जा सकता है।
अतरंगी या गुजराती ड्रेप
गुजराती स्टाइल में पल्लू को सामने की ओर लाकर कंधे पर रखा जाता है, जिससे पल्लू का डिजाइन साफ नजर आता है। यह तरीका त्योहारों और रोज के मौकों पर साड़ी को अलग लुक देने के साथ उसे अच्छी तरह संभालने में मदद करता है।
सीधा पल्लू ड्रेप
सीधे पल्लू वाले स्टाइल में पल्लू को कंधे से सामने की ओर लाकर शरीर के आगे रखा जाता है। इस तरीके से पल्लू आसानी से दिखाई देता है और उसे पिन करके रखने पर काम करते समय संभालने की जरूरत कम पड़ती है।