शराब पीना हर किसी की सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन रिसर्च ये साफ बताती है कि महिलाओं पर इसका असर पुरुषों की तुलना में जल्दी और गहरा होता है। आम धारणा में लोग इसे सिर्फ सहनशक्ति या टॉलरेंस से जोड़कर देखते हैं, लेकिन असल कारण इससे कहीं ज्यादा जटिल है। शरीर की बनावट, वजन और मेटाबॉलिज्म में अंतर महिलाओं को शराब के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है। महिलाएं समान मात्रा में शराब पीने पर पुरुषों की तुलना में तेजी से नशे की स्थिति में पहुंच जाती हैं।
इसका कारण यह भी है कि उनके शरीर में शराब को तोड़ने वाले एंजाइम्स कम सक्रिय होते हैं, जिससे अधिक शराब सीधे खून में पहुंचती है। इसके साथ ही, महिला दिमाग भी शराब के असर को जल्दी महसूस करता है। यही वजह है कि महिलाओं पर शराब का असर पुरुषों से तेज, गहरा और ज्यादा जोखिम भरा होता है।
शोध बताते हैं कि महिलाओं के शरीर में शराब को तोड़ने वाले एंजाइम्स पुरुषों की तुलना में कम एक्टिव होते हैं। इसका मतलब ये है कि शराब का एक बड़ा हिस्सा बिना टूटे सीधे ब्लड में पहुंच जाता है। यही वजह है कि महिलाएं शराब पीते ही जल्दी नशे का अनुभव करती हैं।
शरीर का आकार और वजन भी शराब के असर को प्रभावित करते हैं। महिलाओं का शरीर अक्सर पुरुषों से छोटा और हल्का होता है। इसलिए समान मात्रा में शराब पीने पर उनके ब्लड में अल्कोहल का कॉन्सन्ट्रेशन ज्यादा होता है। छोटे शरीर में शराब जल्दी फैलती नहीं, इसलिए असर भी तेज और गहरा होता है।
शराब का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं होता। ये सीधे दिमाग को प्रभावित करता है। रिसर्च के मुताबिक, महिलाओं का न्यूरोलॉजिकल सिस्टम अल्कोहल पर पुरुषों की तुलना में जल्दी प्रतिक्रिया करता है। इसका नतीजा ये होता है कि महिलाएं जल्दी टिपसी हो जाती हैं और नशे का अनुभव तेजी से महसूस करती हैं।
तो अब साफ है कि महिलाओं का शरीर और दिमाग शराब के असर को मिलकर बढ़ाते हैं। छोटा शरीर, कम एंजाइम्स की एक्टिविटी और दिमाग का तेज रिएक्शन मिलकर शराब का असर महिलाओं पर पुरुषों से ज्यादा बनाते हैं। ये सिर्फ नशे की तीव्रता बढ़ाता है, बल्कि स्वास्थ्य जोखिम भी ज्यादा कर देता है।