Assembly Elections 2023: राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस-बीजेपी के बीच क्यों है कांटे का मुकाबला?

अगले महीने पांच राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं।कई ओपनियन पोल इस बात का संकेत दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बेहतर स्थिति में है, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस-बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला है। कुछ ओपनियन पोल के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हालत थोड़ी बेहतर है, लेकिन राजस्थान में अलग स्थिति है

अपडेटेड Oct 20, 2023 पर 7:28 PM
कुछ ओपनियन पोल के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हालत थोड़ी बेहतर है।

अगले महीने पांच राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि, हिंदीभाषी राज्यों के चुनावों पर ज्यादा फोकस देखने को मिल रहा है। कई ओपिनियन पोल इस बात का संकेत दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बेहतर स्थिति में है, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस-बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला है।

हालांकि, यह कहना बेहद मुश्किल है कि मतदाता किसके पक्ष में वोटिंग करेंगे। बहरहाल, यहां यह बताने की कोशिश की जा रही है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में मुकाबला करीबी क्यों नजर आ रहा है।

मध्य प्रदेश: सत्ता के खिलाफ अपेक्षाकृत कम नाराजगी

हम सभी को याद है कि 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच वोट शेयर का अंतर 1 पर्सेंट से भी कम था। हालांकि, पिछले 7 विधानसभा चुनावों (1990 के बाद से) में जीतने और हारने वाली पार्टियों के बीच अंतर 5 पर्सेंट से कम रहा है। 2003 और 2013 के विधानसभा चुनावों को इस मामले में अपवाद कहा जा


सकता है। 1990 के बाद हुए 7 विधानसभा चुनावों में तीन बार ((1993, 1998 और 2018) कांग्रेस को जीत मिली, जबकि चार बार (1990, 2003, 2008 और 2013) बीजेपी ने जीत हासिल की।

यह सच है कि बीजेपी को मध्य प्रदेश में सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ रहा है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कुछ नाराजगी भी है। हालांकि, बीजेपी सरकार के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी या कांग्रेस के प्रति आकर्षण के संकेत नहीं मिल रहे हैं। कांग्रेस के पास सीएम कमलनाथ के रूप में सीएम का चेहरा है, जो लोकप्रिय हैं। साथ ही, उन्हें पार्टी के भीतर से भी नेतृत्व संबंधी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अलोकप्रिय नहीं है, लेकिन एक कहीं न कहीं एक धारणा बन गई है कि अब बहुत हो गया। ऐसा लगता है कि वोटर फिलहाल दुविधा की स्थिति में हैं। बड़ी संख्या में वोटरों ने अब तक कोई फैसला नहीं किया है। एक्सपर्ट्स की राय में इसी वजह से मध्य प्रदेश में तस्वीर छत्तीसगढ़ की तरफ साफ नहीं दिख रही है।

छत्तीसगढ़: कांग्रेस को बघेल का सहारा

बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में लगातार तीन विधानसभा चुनावों (2003, 2008 और 2013) में जीत हासिल की, लेकिन ऐसे ज्यादातर चुनावों का फैसला 1 पर्सेंट से कम के वोट अंतर पर हुआ। हालांकि, 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़े मार्जिन के साथ वापसी की। कांग्रेस को 90 में से 68 सीटों पर जीत मिली, जबकि बीजेपी सिर्फ 15 सीटें हासिल कर पाई। कांग्रेस का वोट शेयर बीजेपी के मुकाबले 10 पर्सेंट से भी ज्यादा रहा। इसके बाद से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस का झंडा बुलंद कर रखा है। बीजेपी के नेतृत्व के लिए छत्तीसगढञ में वापसी करना बेहद मुश्किल होगा। हालांकि, यह नामुमकिन नहीं है।

राजस्थान: दोनों राज्यों से अलग है कहानी

राजस्थान की कहानी, बाकी दोनों राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़) से अलग है। यह एक ऐसा राज्य है, जहां 1993 के बाद से कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं आई है। चूंकि इस बार कांग्रेस सत्ता में है, लिहाजा इस ट्रेंड के हिसाब से 2023 में बीजेपी को सत्ता में लौटना चाहिए। हालांकि, फिलहाल ऐसा नजर नहीं आता। पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांटे का मुकाबला था और कांग्रेस को 39.3 पर्सेंट वोटों के साथ 100 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी ने 38.8 पर्सेंट वोट के साथ 73 सीटों पर जीत हासिल की थी। राज्य में कांग्रेस और बीजेपी, दोनों की अपनी-अपनी समस्याएं हैं।

हालांकि, कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच फिलहाल सुलह हो गई है, जबकि बीजेपी में वसुंधरा राजे और केंद्रीय नेतृत्व के बीच सत्ता का संघर्ष जारी है। साथ ही, पिछले एक साल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं से भी कांग्रेस को फायदा हो सकता है। अगर बीजेपी में आंतरिक गुटबाजी तेज नहीं होती, उसकी जीत की संभावनाएं प्रबल हो सकती थीं।

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