मध्य प्रदेश में चुनाव अचार संहित लागू होने से पहले कांग्रेस इस बात से परेशान दिखती थी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले बड़ी स्कीम का ऐलान करते थे। फिर, तुरंत उसे लागू करने की अधिसूचना जारी हो जाती थी। चुनावों के ऐलान के बाद अचार संहिता लागू हो गई है। इससे मुख्यमंत्री के नई स्कीम लागू करने पर रोक लग गई है। हालांकि, वे नई स्कीमों का ऐलान करने के लिए आजाद हैं। शिवराज का जवाब देने के लिए कांग्रेस ने 'पढ़ो-पढ़ाओ योजना' का ऐलान किया है। यह कांग्रेस की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका ऐलान पार्टी की स्टार कंपनेटर और महासचिव प्रियंका गांधी ने मांडला जिले में किया है।
कांग्रेस की स्कीम ने भाजपा की बढ़ाई टेंशन
गांधी ने कहा कि इस योजना के तहत पहली से 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स को हर महीने सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप दी जाएगी। यह प्रति माह 500 से 1,500 रुपये के बीच होगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर यह योजना लागू कर दी जाएगी। राज्य में 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य में विधानसभी की कुल 230 सीटे हैं। वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी। यह चुनाव BJP और Congress के लिए कई मायनों में अहम है। हिमाचल और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों को जीतने के बाद कांग्रेस इस चुनाव में जीत हासिल कर यह संदेश देना चाहती है कि वह भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती है। खासकर अगले साल लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यह बहुत अहम है। दूसरी तरफ भाजपा यह दिखाना चाहती है कि मतदाताओं के बीच उसकी लोकप्रियता में किसी तरह की कमी नहीं आई है।
प्रियंका गांधी ने वादा किया कि जिन इलाकों में आदिवासी आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है, उनमें संविधान की छठी अनुसूची लागू की जाएगी। कांग्रेस ने भी मध्य प्रदेश में पंचायत एक्सटेंशन टू शिड्यूल्ड एरियाज (PESA) Act, 1996 लागू करने का ऐलान किया है। अनुसूचित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए कांग्रेस ने PESA Act पारित किया था। इसका मकसद ग्राम सभाओं के जरिए स्व-शासन सुनिश्चित करना है। शिवराज सरकार ने कई बार इसे लागू करने का ऐलान किया है, लेकिन इसे प्रभावी रूप से आज तक लागू नहीं किया जा सका है।
मध्य प्रदेश में अच्छी आदिवासी आबादी
मध्य प्रदेश के 54 जिलों में मान्यताप्राप्त 56 अनुसूचित जनजातियां हैं। इनमें छह बड़े आदिवासी समूह हैं-भील, गोड़, कोल, कुर्कु, सहरिया और बैगा। राज्य की 1.53 करोड़ आदिवासी आबादी में इनकी 90 फीसदी हिस्सेदारी है। संविधान की छठी अनुसूची के तहत अभी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में आदिवासी इलाकों के प्रशासन की इजाजत है। इसका मकसद आदिवासी लोगों की हितों की सुरक्षा है। मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी के लिए पेसा एक्ट लागू करने के शिवराज के वादे की कई वजहे हैं।
शिवराज को आदिवासी वोट मिलने की उम्मीद
शिवराज यह जानते हैं कि पेसा एक्ट लागू करने के वादे से आदिवासी मतदाताओं को अपने पाले में किया जा सकता है। इस वादे की अपील लाडली बहना योजना से ज्यादा है। इस वादे का ऐलान सिर्फ आदिवासी बहुल इलाकों के लिए किया गया है। चुनावी कार्यक्रम के ऐलान से पहले शिवराज किसानों और महिलाओं के लिए किए गए 11 वादों में से छह पूरे करने में कामयाब हो गए थे। इसकी वजह यह है कि राज्य सरकार के पास इन वादों को पूरा करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध थे।
भाजपा नहीं चाहती उस पर लगे नकल का आरोप
शिवराज स्कूली बच्चों के लिए स्कीम का ऐलान करने से बच रहे हैं। इसमें खतरा यह है कि जनता के बीच यह संदेश जा सकता है कि भाजपा कांग्रेस की नकल कर रही है। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री ने स्टूडेंट्स के लिए फ्री एजुकेशन और स्कॉलरशिप स्कीम के एलान के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने यहां तक कहा कि पार्टी के राज्य अध्यक्ष कमल नाथ गांधी परिवार तक के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। वह गांधी परिवार के सदस्यों को झूठे वादे करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने इस स्कीम का ऐलान मांडला जिले में किया। इस इलाके में आदिवासी आबादी ज्यादा है।
दोनों दलों ने लगाई पूरी ताकत
कांग्रेस ने 2018 में अनुसूचित जनजाति (STs) के लिए रिजर्व 47 सीटों में से 31 सीटे जीती थी। वह इस बार इस संख्या को बढ़ाना चाहती है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने चार आदिवासी बहुल इलाकों में एक साथ चुनावी रैलियों को संबोधित किया है। इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्रे मोदी और अमित शान ने भी मध्य प्रदेश में चुनावी रैलियां करने में आदिवासी बहुल इलाकों का खास ध्यान रखा है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में आदिवासी मतदाताओं का रुझान भाजपा की तरफ देखा गया। हालांकि, कांग्रेस भी आदिवासी वोट हासिल करने में सफल रही है। अब कांग्रेस आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी अपील बढ़ाना चाहती है।