MP Election 2023: कांग्रेस (Congress) ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (MP Assembly Election) के लिए 88 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी और अंतिम लिस्ट जारी कर दी है। पार्टी ने सिर्फ एक सीट को होल्ड पर रख कर राज्य की 230 में से 229 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। हालांकि, पार्टी ने बैतूल जिले की आमला सीट (Amla seat) से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसके पीछे कारण भी कहीं न कहीं बीजेपी ही है और ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी ने ये सीट डिप्टी कलेक्टर नीशा बांगरे (Nisha Bangre) के लिए खाली छोड़ी है।
दरअसल निशा बांगरे तब चर्चाओं में आईं, जब उन्होंने करीब तीन महीने पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने उनका इस्तीफा अब तक मंजूर नहीं किया।
निशा बांगरे आमला की ही रहने वाली हैं और उन्होंने इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया है। सरकार की तरफ से इस्तीफा मंजूर न करने के कारण निशा ने हाई कोर्ट का रुख किया।
बांगरे छतरपुर जिले के लव कुश नगर में तैनात थीं।शुरुआत में हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने GAD को 30 दिनों के भीतर उनके इस्तीफे के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया।
जब ये समयसीमा पूरी नहीं हुई, तो वह फिर से अदालत में पहुंचीं। साथ ही, राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की। दोनों याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश आरवी मलिमथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार को अधिकारी के इस्तीफे पर निर्णय लेने से पहले उसके खिलाफ विभागीय जांच (DE) करने की अनुमति दी।
ये निर्णय तब आया जब राज्य सरकार के वकील ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ एक DE लंबित थी और DE पूरी होने से पहले उनके इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं किया जा सकता था। इसके विपरीत, बांगरे ने तर्क दिया कि उन्होंने जांच में उनके खिलाफ लगाए गए छोटे आरोपों को स्वीकार कर लिया है और उनके इस्तीफे पर निर्णय DE के पूरा होने से पहले किया जा सकता है।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और स्पेशल लीव पिटीशन फाइल की। सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने अधिकारी को वापसे हाई कोर्ट जाने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट के जजों ने संकेत दिया कि अगर ऐसा कोई आवेदन दायर किया जाता है, तो वे उस पर विधिवत विचार करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे सामने ये दृढ़ता से प्रस्तुत किया गया है कि याचिकाकर्ता ने आरोपों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन उचित आदेश पारित करने में देरी हो रही है। हमें आशा और विश्वास है कि एसएलपी को खारिज करते हुए आदेश शीघ्र पारित किया जाएगा।"
सुप्रीम कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया में देरी के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर को फटकार लगाई। सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि केस की अर्जेंसी को समझते हुए हाईकोर्ट एक दो दिन में ही मामले की सुनवाई करें।
भले ही बांगरे ने ये साफ नहीं किया है कि वह किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी, लेकिन उन्हें अलग-अलग कांग्रेस नेताओं से समर्थन मिला है। पार्टी के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील हैं।
अब पार्टी ने उनके लिए सीट भी खाली छोड़ दी है। इस सब से संकेत यही मिलता है कि अगर अदालत से उनका वह कांग्रेस से ही चुनाव लड़ सकती हैं।