MP Election 2023: कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में दलबदलुओं को भरपूर मौका, भितरघात करने वालों पर फिर से जताया भरोसा
MP Election 2023: इस लिस्ट में पार्टी ने न सिर्फ दलबदलू बल्कि बगावत करने वाले नेताओं को भी जगह दी। इसके अलावा एक नेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने बुधवार दिन में बीजेपी से इस्तीफा दिया, तो रात को कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया। आइए एक नजर इस लिस्ट में शामिल ऐसे ही नेताओं पर डालते हैं, जो बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आए
MP Election 2023: कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में दलबदलुओं को भरपूर मौका, भितरघात करने वालों पर फिर से जताया भरोसा
MP Election 2023: कांग्रेस (Congress) ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (MP Assembly Election) के लिए 88 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी लिस्ट (Second List) की घोषणा कर दी है। गुरुवार देर रात जारी की गई इस लिस्ट के साथ, पार्टी ने 17 नवंबर को होने वाले 230 सदस्ययों वाली विधानसभा के चुनाव के लिए सिर्फ एक सीट को छोड़कर सभी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इस लिस्ट में दूसरे दलों से आए नेताओं को भी अच्छा खासा मौका दिया गया है।
इस लिस्ट में पार्टी ने न सिर्फ दलबदलू बल्कि बगावत करने वाले नेताओं को भी जगह दी। इसके अलावा एक नेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने बुधवार दिन में बीजेपी से इस्तीफा दिया, तो रात को कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया। आइए एक नजर इस लिस्ट में शामिल ऐसे ही नेताओं पर डालते हैं, जो बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आए।
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को टिकट
पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी कुछ ही महीनों पहले बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आए थे। उन्हें अब पार्टी ने देवास की खाते गांव सीट से टिकट दिया है। हाल ही में इस इलाके में दीपक जोशी के खिलाफ पोस्ट भी लगे थे। इन पोस्टर पर दीपक की फोटो के साथ लिखा गया था- 'कांग्रेस से नहीं चलेगा, नहीं चलेगा।'
टिकट मिलने से पहले दीपक जोशी कई बार सार्वजनिक रूप से और पार्टी की बैठकों में भी नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच ये कह चुके थे कि वे पार्टी के लिए सालों से काम कर रहे किसी स्थानीय नेता का हक मार कर चुनाव नहीं लड़ेंगे।
'दलबदल में माहिर' नेता को टिकट
कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में सेमरिया विधानसभा सीट के लिए विंध्य के बड़े नेता अभय मिश्रा को टिकट दिया गया है। अजय मिश्रा को 'दलबदल में माहिर नेता' भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह पहले कांग्रेस में थे, फिर 11 अगस्त को उन्होंने BJP का दामन थाम लिया। हालांकि, करीब दो महीने के भीतर ही उन्होंने बीजेपी से भी इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद उन्होंने फिर से अपनी पुरानी पार्टी का ही रुख करने का फैसला किया। कांग्रेस की लिस्ट आने से दो दिन पहले ही बीजेपी छोड़ी और मजेदार बात ये है कि बुधवार सुबह ही वे कांग्रेस में आए और रात को उन्हें टिकट दिए जाने का ऐलान भी हो गया।
ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें बीजेपी की तरफ से सेमरिया सीट से टिकट मिलना था, लेकिन जब यह तय हो गया कि बीजेपी उन्हें टिकट नहीं देने वाली है, तो उन्होंने एक बार फिर से पलटी मार ली और कांग्रेस में वापसी करके विधानसभा का टिकट हासिल कर लिया।
खबर ये भी है सेमरिया क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ता अभय मिश्रा के खिलाफ थे। इतना ही नहीं कार्यकर्ताओं ने पार्टी को पत्र लिखकर भी विरोध जताया था।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो कांग्रेस भी उन्हें सेमरिया से नहीं बल्कि रीवा से चुनाव लड़ाना चाहती थी। क्योंकि 2018 के चुनाव में पार्टी उन्हें रीवा से ही चुनाव लड़ाया था। हालांकि, अभय 18,089 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
BJP से आए पूर्व विधायक को टिकट
कांग्रेस ने धार जिले की बदनावर सीट से बीजेपी से आए पूर्व विघायक भंवर सिंह शेखावत को टिकट दिया है। उन्होंने सितंबर में नाराजगी के चलते बीजेपी से इस्तीफा दिया था और कांग्रेस की हाथ थाम लिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि 'मुझे बीजेपी छोड़ने पर मजबूर किया गया।' ऐसा माना जाता है कि वे सिंधिया खेमे के नेताओं के पार्टी में आने से काफी नाराज था। उन्होंने कहा, "संगठन में आए लोग वरिष्ठों की उपेक्षा कर रहे हैं। उनका रवैया भी अड़ियल है।"
उन्होंने कहा, "जिस नेता ने मुझे चुनाव हराया, वह भाजपा में शामिल हो गया। जो नेता पार्टी से बगावत करते हैं, उन्हें भी पार्टी अपना लेती है। भाजपा नेता विचारधारा छोड़कर अब निजी स्वार्थों के लिए काम कर रहे हैं।"
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के भाई को टिकट
करीब एक महीने पहले BJP से कांग्रेस में आए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा के भाई गिरजाशंकर शर्मा को पार्टी ने होशंगाबाद सीट से टिकट दिया है।
कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद शर्मा ने कहा था कि जब पार्टी में दरी बिछाने के लिए कार्यकर्ता नहीं मिलते थे, तब से पार्टी के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब BJP में किसी की कोई सुनवाई नहीं है। अब सिर्फ जी हुजूरी करने वालों की जरूरत है।
इससे पहले खबर ये थी कि गिरजाशंकर को उनके भाई खिलाफ नर्मदापुरम से मैदान में उतारा जा सकता है। क्योंकि सीतासरण बीजेपी के ही विधायक हैं। इस पर गिरजाशंकर ने कहा था कि अगर उनके भाई को टिकट मिला, तो वो उनके सामने न तो चुनाव लड़ेगे और न ही प्रचार करेंगे।
BJP से इस्तीफा दिया नहीं और कांग्रेस ने दे दिया टिकट
इस लिस्ट में एक ऐसे नेता का भी नाम है, जिन्होंने बीजेपी से इस्तीफा नहीं दिया, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया। बीजेपी की मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष सरोज राय के बेटे अमित राय को कांग्रेस ने निवाड़ी से टिकट दिया है।
पिछले पंचायत चुनाव में अमित पर भितरघात के आरोप लगे थे और पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। हालांकि, करीब नौ महीने पहले ही शिवराज और नरोत्तम मिश्रा की मौजूदी में पार्टी में उनकी दोबारा वापसी कराई गई।
हैरानी की बात ये है कि अमित राय बीजेपी के जिला अध्यक्ष हैं और उन्होंने अब तक बीजेपी से इस्तीफा भी नहीं दिया और कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता तक नहीं ली। फिर भी कांग्रेस ने उन्हें यहां से अपना उम्मीदवार बना दिया।
बीजेपी से आए सिंधिया के वफादर को टिकट
पिछले महीने ही बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आने वाले समंदर पटेल को नीमच जिले की जावद सीट से टिकट मिला है। समंदर सिंह उन नेताओं में से एक थे, जो 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में गए थे।
हालांकि, अब उन्होंने बीजेपी में अपमानित महसूस होने के आरोप लगाया है। इतना ही नहीं समंदर 800 से ज्यादा गाड़ियों के काफिल के साथ नीमच के जावद इलाके से भोपाल के PCC दफ्तर पहुंचे थे।
अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस को झटका देने वाले को टिकट
इस लिस्ट में एक नाम पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी का भी है। राकेश सिंह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश सिंह चतुर्वेदी के बड़े भाई हैं और पूर्व मंत्री रह चुके हैं।
जुलाई 2013 के विधानसभा सेशन में बीजेपी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान चौधरी राकेश सिंह ने अपनी ही पार्टी से बगावत कर दी थी। पिछले विधानसभा चुनाव में राकेश सिंह बीजेपी के ही उम्मीदवार हैं।
ऐसा बताया जाता है कि भिंड सीट से कांग्रेस के पास दावेदार तो कई थे, लेकिन दमदारी इतनी नहीं थी, न ही प्रदेश स्तरीय चेहरा जिसे बीजेपी के आगे खड़ा करना जीत की उम्मीद देता। इसके बाद कांग्रेस को बीजेपी से आए राकेश सिंह पर ही दांव लगाना पड़ा।