MP Election 2023: राऊ में कांग्रेस के जीतू पटवारी को जीत की हैट्रिक लगाने से रोक पाएंगे BJP के मधु वर्मा? पुराने चेहरों के बीच चुनावी जंग

MP Election 2023: कांग्रेस ने 49 साल के मौजूदा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी (Jitu Patwari) को इस क्षेत्र से लगातार चौथी बार मैदान में उतारा है, तो बीजेपी ने 71 साल के अपने वरिष्ठ नेता मधु वर्मा (Madhu Verma) पर दूसरी बार दांव लगाया है। पटवारी ने साल 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान वर्मा को 5,703 वोटों के नजदीकी अंतर से हराया था

अपडेटेड Oct 17, 2023 पर 7:08 PM
MP Election 2023: राऊ में कांग्रेस के जीतू पटवारी को जीत की हैट्रिक लगाने से रोक पाएंगे BJP के मधु वर्मा?

MP Election 2023: मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के राऊ विधानसभा क्षेत्र (Rau Assembly Seat) में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) की ओर से इस बार भी वे ही उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जो 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों में भिड़े थे। कांग्रेस ने 49 साल के मौजूदा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी (Jitu Patwari) को इस क्षेत्र से लगातार चौथी बार मैदान में उतारा है, तो बीजेपी ने 71 साल के अपने वरिष्ठ नेता मधु वर्मा (Madhu Verma) पर दूसरी बार दांव लगाया है।

पटवारी ने साल 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान वर्मा को 5,703 वोटों के नजदीकी अंतर से हराया था। इंदौर के शहरी और ग्रामीण इलाकों को समेटने वाली राऊ सीट पर 3.56 लाख मतदाता 17 नवंबर को उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

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इस सीट पर साल 2008 से लेकर 2018 के बीच तीन बार चुनाव हुए हैं। 2008 के चुनावों में पटवारी को बीजेपी उम्मीदवार जीतू जिराती के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2013 और 2018 के चुनावों में पटवारी ने लगातार दो बार जीत हासिल की।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, वर्मा इस बार पटवारी को जीत की ‘हैट्रिक’ बनाने से रोकने के लिए BJP की ओर से चुनावी मोर्चा संभाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री रहने के बावजूद पटवारी राऊ क्षेत्र के मतदाताओं को बड़े सरकारी अस्पताल की बुनियादी सुविधा देने का वादा निभाने में नाकाम साबित हुए हैं। इंदौर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष वर्मा का दावा है कि राऊ क्षेत्र का विकास प्रदेश की BJP सरकार की देन है।

पितातुल्य वर्मा से जीत का आशीर्वाद लूंगा: पटवारी

उधर, पटवारी ने वर्मा का आरोप खारिज करते हुए कहा, "राऊ, सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परंपरागत निर्वाचन क्षेत्र बुधनी से भी ज्यादा विकसित है।"

पटवारी ने वर्मा की उम्र पर इशारों ही इशारों में निशाना साधते हुए कहा, "वर्मा मेरे पितातुल्य और अच्छे इंसान हैं, लेकिन भारतीय परंपराओं में साफ है कि एक वक्त के बाद घर के कामों की जिम्मेदारी बेटे को ही संभालनी पड़ती है और पिता केवल मार्गदर्शन करता है। मैं अपने पितातुल्य वर्मा से जीत का आशीर्वाद लूंगा।"

पटवारी पर पलटवार करते हुए वर्मा ने कहा, "जनहित के कामों का किसी व्यक्ति की उम्र से कोई ताल्लुक नहीं होता। मुझसे कम उम्र का होने पर भी पटवारी ने राऊ क्षेत्र के लोगों की चिंता नहीं की। यही वजह है कि मुझ जैसे पिता सरीखे व्यक्ति को चुनावी मैदान में आना पड़ा।"

राऊ के चुनावी रण में ये मुद्दे अहम

पटवारी और वर्मा के बीच जारी जुबानी जंग के बीच राऊ के चुनावी रण में खेती-किसानी के मुद्दे भी अहम हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में किसान मतदाताओं की तादाद भी कम नहीं है। राऊ क्षेत्र के किसान राज्य सरकार की 3,200 एकड़ पर प्रस्तावित इंदौर-पीथमपुर आर्थिक गलियारा परियोजना के लिए खेती की उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। यह इलाका आलू की खेती के लिए भी मशहूर है।

इन दिनों सिंदोड़ा गांव के अपने खेत में आलू की बुआई कर रहे किसान अतुल कुशवाह ने कहा, "राज्य सरकार इंदौर-पीथमपुर आर्थिक गलियारा परियोजना के नाम पर हमारी उपजाऊ जमीन मौजूदा बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम मुआवजा देकर अधिग्रहित करना चाहती है, ताकि इसे बड़े-बड़े उद्योगपतियों को दिया जा सके। हम इस अन्याय का विरोध करते हैं।"

कुशवाह ने कहा कि चुनावी बेला में पटवारी और वर्मा, दोनों प्रमुख उम्मीदवारों की ओर से किसानों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि वे उनके साथ हैं और उनकी मर्जी के बगैर उनकी जमीन कतई नहीं लेने दी जाएगी। इस पढ़े लिखे किसान ने कहा, "...पर चुनावों के बाद सरकार बनने पर कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है और सभी राजनीतिक दल अपनी ही रोटियां सेंकते हैं।"

क्या है जातीय समीकरण?

राऊ विधानसभा क्षेत्र में कुल 325709 मतदाता हैं, जिनमें 165465 पुरुष और 160240 महिला वोटर हैं और 4 अन्य हैं। इस सीट पर खाती समाज के मतदाताओं की अच्छा खासा बहुमत है। इसीलिए कांग्रेस यहां जीतू पटवारी के दम पर चुनाव में उतरती आई है। हालांकि, इंदौर से सटे शहरी इलाके में यहां बड़ी संख्या में मराठी मतदाता हैं। उनकी इस विधानसभा क्षेत्र के 8 वार्ड में अच्छी खासी पकड़ है। इसके अलावा ब्राह्मण और पिछला वर्ग के वोटर्स भी निर्णायक भूमिका में होते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए खाती समाज के अलावा दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों का फोकस मराठी वोट बैंक के अलावा ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं पर भी होता है। इस वोट बैंक को साधना दोनों ही पार्टी की मजबूरी होती है। लिहाजा अपने-अपने तरीके से दोनों ही दल हर बार मतदाताओं को अपने खेमे में बनाए रखने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ते।

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