इस साल के आखिर में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) होने हैं। ये राज्य हैं- राजस्थान (Rajasthan), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), मध्यप्रदेश (MP), मिजोरम (Mizoram) और तेलंगाना (Telangana)। ऐसे में सभी पार्टियां चुनावी रण की तैयारियों में जुट गई हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस (Congress) ने सोमवार को अपनी केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की घोषणा की, जिसमें 16 सदस्यों को रखा गया है। बड़ी बात ये है कि समिति में राजस्थान के किसी भी नेता का नाम नहीं है। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 90 साल के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा एके एंटनी, जनार्दन द्विवेदी और एम वीरप्पा मोइली जैसे दिग्गजों को भी हटा दिया।
चुनाव समिति का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष करते हैं, जो लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों का चयन करती है। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि राजस्थान में भी इस साल के आखिर में चुनाव होना है, फिर पार्टी ने राज्य के किसी नेता को समिति में जगह क्यों नहीं दी?
जबकि उसी सेंट्रल इलेक्शन कमेटी में छत्तीसगढ़ से उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव और मध्य प्रदेश के विधायक ओमकार मरकाम का नाम शामिल है।
16 सदस्यों वाली CEC के नए सदस्यों में लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद, मधुसूदन मिस्त्री, एन उत्तम कुमार रेड्डी, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव, कर्नाटक के मंत्री केजे जॉर्ज, किशनगंज सांसद मोहम्मद जावेद, राज्यसभा सांसद अमी याजनिक, पीएल पुनिया और उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेस प्रमुख प्रीतम सिंह शामिल हैं।
इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष मल्ल्किार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा सांसद राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल भी CEC के सदस्य हैं।
रेड्डी, देव, जॉर्ज, सिंह, जावेद, याज्ञनिक और मरकाम जैसे कांग्रेस नेताओं के लिए एक बड़ा प्रमोशन है। क्योंकि ये नेता अब पार्टी के शीर्ष पैनल में अपनी जगह बना चुके हैं।
मधुसूदन मिस्त्री कांग्रेस केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख थे, जिसने पिछले साल पार्टी के राष्ट्रपति चुनाव कराए थे। पुनिया हाल तक छत्तीसगढ़ के AICC प्रभारी थे।