Rajasthan assembly election 2023: राजस्थान की इन 10 सीटों पर है सबकी निगाहें

राजस्थान में चुनाव को लेकर राजनीति पीक पर है। कांग्रेस के अशोक गहलोत इस बार उस ट्रेंड को खत्म करने की हरमुमकिन कोशिश में जुटे हैं, जिसके तहत राज्य में हर 5 साल के बाद सरकार बदल जाती है। वहीं, बीजेपी भी सत्ता विरोधी भावना को भुनाने में जुटी है। लोक-लुभावन वादों के मामले में कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है

अपडेटेड Nov 09, 2023 पर 9:27 PM
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राजस्थान में इस बार 43 लाख नए वोटर मतदान करेंगे और ये कई सीटों पर नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

राजस्थान में चुनाव को लेकर राजनीति पीक पर है। कांग्रेस के अशोक गहलोत इस बार उस ट्रेंड को खत्म करने की हरमुमकिन कोशिश में जुटे हैं, जिसके तहत राज्य में हर 5 साल के बाद सरकार बदल जाती है। वहीं, बीजेपी भी सत्ता विरोधी भावना को भुनाने में जुटी है। लोक-लुभावन वादों के मामले में कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है, मसलन 25 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस कवर, मुफ्त मोबाइल, मुफ्त राशि आदि।

दूसरी तरफ, बीजेपी ने कांग्रेस पर कई तरह के घोटालों में शामिल होने का आरोप लगाया है, मसलन प्रश्नपत्र लीक मामला, फेमा का उल्लंघन और जल जीवन मिशन। इस बार राज्य में 43 लाख नए वोटर मतदान करेंगे और कई सीटों पर ये नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

हमने राज्य की उन टॉप 10 विधानसभा सीटों का जायजा लिया है, जहां मुकाबला काफी दिलचस्प है:


1. सरदारपुरा

इस विधानसभा सीट की पहचान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के क्षेत्र के तौर पर है और यह जोधपुर इलाके में मौजूद है। यह विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ है और 1998 के बाद से पार्टी यहां एक भी चुनाव नहीं हारी है। इसी साल, गहलोत यहां से चुने गए थे और उसके बाद से वह चुनाव नहीं हारे हैं। 1993 के चुनाव में यहां बीजेपी ने जीत हासिल की थी। बीजेपी ने इस बार यहां गहलोत के खिलाफ महेंद्र सिंह राठौड़ को चुनाव मैदान में उतारा है। राठौर जोधपुर की जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और जोधपुर डिवेलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व चेयरमैन हैं।

2. झालरापाटन

यह विधानसभा सीट राज्य के दक्षिणी हिस्से में मौजूद है और यहां से राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे सिंधिया विधायक रह चुकी हैं। राजे 2003 से इस सीट पर लगातार जीत हासिल करती रही हैं। कांग्रेस ने पिछली बार 1998 में यहां से चुनाव जीता था। वसुंधरा राजे ने पिछले चुनाव में कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को 35,000 से भी ज्यादा वोटों से हराया था। वह यहां के स्थानीय लोगों की पसंद हैं और सत्ता में कोई भी पार्टी रहे, उनके इस सीट पर जीतने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

3. टोंक

टोंक राजस्थान की राजधानी जयपुर से 100 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। टोंक विधानसभा सीट राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का क्षेत्र है। पायलट की टोंक में काफी लोकप्रियता है। गहलोत या राजे के उलट पायलट ने पहली बार यहां से 2018 में चुनाव लड़ा था। बीजेपी ने 2018 में यहां अल्पसंख्यक उम्मीदवार युनूस खान को मैदान में उतारा था, जिन्हें पायलट ने 50,000 से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। इस बार बीजेपी ने यहां से पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता को मैदान में उतारा है। उन्होंने 2013 में टोंक से जीत हासिल की थी। गुर्जरों को लुभाने के लिए बीजेपी ने इस बार दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी को वहां चुनाव प्रचार में लगा रखा है।

4. विद्याधर नगर

बीजेपी सांसद दीया कुमारी को यहां से विधानसभा चुनाव लड़ाने के ऐलान के बाद यह सीट रातोरात चर्चा में आ गई। माना जा रहा है कि वह राजस्थान बीजेपी का नया चेहरा हो सकती हैं यानी अगर बीजेपी जीतती है, तो वह राज्य की अगली मुख्यमंत्री बनने की रेस में होंगी। यह विधानसभा क्षेत्र जयपुर इलाके में पड़ता है, जो कुमारी का गृह क्षेत्र है। वह जयपुर राज परिवार की राजकुमारी हैं। बीजेपी 2008 से यह सीट जीतती आ रही है। स्वर्गीय भैरो सिंह शेखावत के रिश्तेदार नरपत सिंह राजवी यहां से तीन बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन इस बार उन्हें यहां से हटाकर चित्तौड़गढ़ से टिकट दिया गया है। हालांकि, इस फैसले से राजवी के कई समर्थक नाखुश हैं।

5. लक्ष्मण गढ़

यह सीट जयपुर से 150 किलोमीटर दूर सीकर जिले में मौजूद है। लक्ष्मण गढ़ राजस्थान के कांग्रेस अध्यक्ष और बहुचर्चित नेता गोविंद सिंह डोटासरा का गृह क्षेत्र है। बीजेपी ने उन पर एग्जाम पेपर लीक घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है। एंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट पहले ही उनके ठिकानों पर छापेमारी कर चुका है। साथ ही, उनके दो बेटों को समन जारी किया गया था। डोटासरा इस सीट पर 2008 से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। हालांकि न्यू18 की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पेपर लीक के बावजूद डोटासरा अपने चुनाव क्षेत्र में लोकप्रिय उम्मीदवार हैं।

6. सवाई माधोपुर

जयपुर के करीब यह सीट बीजेपी के राज्यसभा सासंद और राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा किरोड़ी लाल मीणा को दी गई है। 1998 से इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी बारी-बारी से जीतती आई है। मीणा ने 2003 में इस सीट पर जीत हासिल की थी। विद्याधर नगर से बीजेपी की मौजूदा उम्मीदवार दीया कुमारी ने 2013 में यहां से जीत हासिल की थी। पिछली बार कांग्रेस के दानिश अबरार इस सीट पर विजयी हुए थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मीणा समुदाय के शख्स को उम्मीदवार बनाया था। बहरहाल, किरोड़ी लाल मीणा को मीणा समुदाय का काफी बड़ा नेता माना जाता है।

7. नाथद्वारा

इस सीट पर दिग्गजों का मुकाबला है। कांग्रेस के पुराने नेता सी पी जोशी यहां से चुनाव लड़ रहे हैं, जो यहां से मौजूद विधायक भी हैं। दूसरी तरफ, महाराणा प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ बीजेपी से उम्मीदवार हैं। तकरीबन 30 साल के बाद ऐसा मौका देखने को मिला है, जब महाराणा प्रताप के परिवार का कोई शख्स राजनीति से जुड़ा हो। नाथद्वारा मेवाड़ क्षेत्र का हिस्सा है। विश्वराज सिंह मेवाड़ को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने इस क्षेत्र के राजपूतों को लुभाने की कोशिश की है।

8. झोटवाड़ा

जयपुर के बाहरी हिस्से में मौजूद यह सीट इसलिए सुर्खियों में है, क्योंकि यहां से जयपुर ग्रामीण के मौजूदा बीजेपी सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। राठौड़ इसे भले ही अपने के लिए बेहतर अवसर बता रहे हों, लेकिन स्थानीय बीजेपी नेताओं का टिकट कटने के कारण बीजेपी सांसद को यहां विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछली बार कांग्रेस ने यह सीट जीती थी। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार लालचंद कटारिया ने बीजेपी के राजपाल सिंह शेखावत को हराया था।

9. चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ को रानी पद्मावती की भूमि कहा जाता है और यहां एक बार फिर से राजपूतों की नाराजगी देखने को मिल रही है। बीजेपी ने यहां दो बार के विधायक चंद्रभान सिंह का टिकट काटकर नरपत सिंह राजवी को टिकट दिया है, जो विद्याधर नगर से टिकट नहीं मिलने पर नाराज थे। चंद्रभान सिंह ने यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, सिंह को राजपूतों का भी समर्थन मिल रहा है, जो इस सीट पर काफी अहम हैं।

10. हवा महल

जयपुर शहर के मुख्य इलाके में मौजूद यह सीट अपनी लोकेशन की वजह से काफी अहम है। यहा कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस पार्टी ने इस बार मंत्री महेश जोशी को टिकट नहीं दिया है और उनके बदले आर आर तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा है। बीजेपी ने भगवाधारी स्वामी बालमुकुंद आचार्य को यहां से उम्मीदवार बनाया है और पार्टी को कांग्रेस के हालात का फायदा मिलने की उम्मीद है। बीजेपी ने इस सीट पर 2013 में जीत हासिल थी, जब पार्टी ने सुरेंद्र पारीक को यहां से उम्मीदवार बनाया था।

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