Rajasthan Election 2023 : राजस्थान में इस बार के विधानसभा चुनावों में जिस शख्स पर सबसे ज्यादा नजरें लगी हुई हैं, वह हैं सचिन पायलट (Sachin Pilot)। इसकी कई वजहें हैं। लेकिन, सबसे बड़ी वजह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और पायलट के रिश्तों की तल्खी है। 2018 में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद के पांच सालों में दोनों के रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे। पायलट ने इस दौरान कई बार गहलोत के खिलाफत बगावत की। एक बार तो वह कांग्रेस से रिश्ता तोड़ने के करीब पहुंच गए थे। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व किसी तरह पायलट को पार्टी में बने रहने के लिए मनाने में कामयाब रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कांग्रेस इस बार चुनाव जीत जाती है तो राज्य के सीएम की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
लगातार दूसरी बार कांग्रेस की जीत की उम्मीद
न्यूज18 ने पायलट के साथ बातचीत में उनसे पहला सवाल यही पूछा। पायलट ने बगैर एक क्षण सोचे कहा कि कांग्रेस के लिए पहले चुनावों में जीत हासिल करना जरूरी है, उसके बाद ही यह तय होगा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि राज्य के वोटर्स इस बार परंपरा को तोड़ेंगे और कांग्रेस को लगातार दूसरी बार कांग्रेस चलाने का मौका देंगे। पायलट के जवाब से कम से कम यह तो साफ हो जाता है कि फिलहाल गहलोत और उनके बीच सुलह की स्थिति है, जो कांग्रेस के हित में है।
मल्लिकार्जुन खड़गे की नसीहत
कांग्रेस ने पायलट को दोबारा टोंक से टिकट दिया है। पायलट ने न्यूज18 को बताया कि गहलोत और वह अब एक साथ हैं। उन्होंने कहा, "मल्लिकार्जुन खड़ने ने मुझसे कहा...तुम्हें पुरानी चीजें भूलनी होगी और आगे बढ़ना होगा। शब्द एक बार जुबान से निकलने के बाद वापस नहीं लिए जा सकते। हमें इसे परे सोचना होगा। इसलिए हमलोग मिलकर काम कर रहे हैं। जब आप राजस्थान के लोगों के हित के बारे में सोचते हैं तो आपको व्यक्तिगत पसंद और नापंसद को प्रायरिटी में सबसे नीचे रखना पड़ता है। राजस्थान की जनता को हमसे काफी उम्मीदें हैं।" 22 अक्टूबर को न्यूज18 को पायलट का दिया यह इंटरव्यू कई सवालों का जवाब देता है। इससे गहलोत और पायलट के मौजूदा रिश्तों को लेकर भी तस्वीर साफ हो जाती है।
भाजपा में ठीक नहीं चल रहा सबकुछ
न्यूज18 ने पायलट के मन को टटोलने के लिए दोबारा पूछा कि अगर कांग्रेस जीत जाती है तो क्या वह सीएम बनेंगे? पायलट ने इसके जवाब में कहा, "हमारे लिए सबसे जरूरी है चुनाव जीतना। भविष्य में क्या होगा, यह मुझे भी पता नहीं। पहले हमें चुनाव जीतने पर फोकस करना है, उसके बाद हम देखेंगे कि क्या होता है। अभी भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। वसुंधरा राजे को जिस तरह से हाशिये पर रखा जा रहा है, उससे यह साफ हो जाता है। भाजपा विपक्षी दल की भूमिका निभाने में भी नाकाम रही है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस के पक्ष में जो लहर है, उसका फायदा राजस्थान में भी पार्टी (कांग्रेस) को मिल रहा है।"
गहलोत ने पायलट पर लगाए थे गंभीर आरोप
पायलट की ये बातें भले ही कांग्रेस के लिए उम्मीद जगाती हैं, लेकिन जिस तरह से पिछले पांच सालों में पायलट और सचिन कई बार खुलकर एक-दूसरे के सामने आए हैं, उससे लगता है कि सिर्फ चुनावों को देखते हुए डिप्टी सीएम ने अपनी बेइज्जती के जहर को फिलहाल पी लिया है। 2018 के चुनावों में कांग्रेस के जीतने के बाद आलाकमान ने गहलोत को मुख्यमंत्री और पायलट को उप-मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन, कभी दोनों एक दिशा में चलते नहीं देखे गए। गहलोत ने पायलट पर जिस तरह के आरोप लगाए थे, उसे किसी के लिए भी भूला देना बहुत मुश्किल है। गहलोत ने पायलट को 'नक्कारा' और 'गद्दार' तक कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि पायलट ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की है। लेकिन, हर बार दोनों नेताओं के बीच मान-मनौवल की कांग्रेस नेतृत्व की कोशिशों के बाद स्थिति नियंत्रण में बनी रही।