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Rajasthan Election 2023 : पिछले 47 दिनों में राहुल गांधी की राज्य में एक भी रैली नहीं, कांग्रेस के लिए क्या हैं इसके मायने?

इस बार कांग्रेस और BJP के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है। भाजपा ने चुनाव जीतने और राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस भी किसी तरह से कमजोर नजर नहीं आ रही। लेकिन, राजस्थान में राहुल गांधी की गैर-मौजूदगी हैरान करने वाली है। अंतिम बार वह 23 सितंबर को जयपुर आए थे। यह करीब डेढ़ महीने पहले की बात है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 10, 2023 पर 2:33 PM
Rajasthan Election 2023 : पिछले 47 दिनों में राहुल गांधी की राज्य में एक भी रैली नहीं, कांग्रेस के लिए क्या हैं इसके मायने?
बताया जाता है कि दिवाली बाद राहुल गांधी राजस्थान के चुनावी अभियान पर अपना फोकस बढ़ाएंगे। तब तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव खत्म हो चुके होंगे। राजस्थान में राहुल गांधी और प्रियंका के लिए कई चुनावी रैलियां तय हैं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी राजस्थान में नहीं दिखी है। राज्य में 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस बार कांग्रेस और BJP के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है। भाजपा ने चुनाव जीतने और राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस भी किसी तरह से कमजोर नजर नहीं आ रही। लेकिन, राजस्थान में राहुल गांधी की गैर-मौजूदगी हैरान करने वाली है। अंतिम बार वह 23 सितंबर को जयपुर आए थे। यह करीब डेढ़ महीने पहले की बात है। उधर, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अक्टूबर में राजस्थान में तीन चुनावी रैलियां कीं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि इस बार राज्य में भाजपा का जीतना तय है, क्योंकि 1993 के बाद से राज्य में कोई पार्टी दोबारा सत्ता में लौटने में कामयाब नहीं रही है। पिछली बार यानी 2018 में कांग्रेस ने BJP को सत्ता से बेदखल कर दिया था।

हाईकमान से गहलोत के खराब रिश्ते

इसमें कोई संदेह नहीं कि कांग्रेस हाईकमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से तब से नाखुश है जब उन्होंने अपने समर्थक विधायकों के साथ पिछले साल 25 सितंबर को कांग्रेस विधायक दल (CLP) में शामिल होने के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया था। तब 92 विधायकों ने इस आदेश को ठुकरा दिया था। इसकी जगह वे सभी राज्य सरकार में मंत्री शांति कुमार धारीवाल के आवास पर जमा हो गए थे। उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने तक की धमकी दे दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर सचिन पायलट या उनके किसी समर्थक को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो वे इस्तीफा दे देंगे।

गहलोत ने हाईकमान का निर्देश नहीं माना था

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