Rajasthan Election 2023: कहीं कांग्रेस के सामने बगावत तेज, तो कहीं थम नहीं रहा बीजेपी का विरोध, डैमेज कंट्रोल में जुटी पार्टियां
Rajasthan Election 2023: दोनों ही पार्टियों के भीतर बगावत इस हद तक बढ़ चुकी है कि कई सीटों पर टिकट न मिलने से नाराज नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर नामांकन भरने की तारीख तक बता दी। इसमें कुछ नेता ऐसे भी, जो अपनी मौजूदा पार्टी से टिकट न मिलने के कारण, किसी और पार्टी में चले गए। कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने तीसरे दल का राह चुन ली है
Rajasthan Election 2023: कहीं कांग्रेस के सामने बगावत तेज, तो कहीं थम नहीं रहा बीजेपी का विरोध
Rajasthan Election 2023: विधानसभा चुनाव (Assembly Election) नजदीक आने के साथ ही राजस्थान (Rajasthan) में सत्ताधारी कांग्रेस (Congress) और विपक्ष में बैठी बीजेपी के भीतर बगावत के सुर भी तेज हो चले हैं। टिकट बंटने के बाद दोनों ही दलों में नाराज नेताओं की संख्या बढ़ने लगी है। करीब 12-13 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस को बगावत का सामना करना पड़ रहा है, तो आठ सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी को अपने ही नाराज नेताओं का विरोध झेलना पड़ रहा है। 200 सीटों वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अब तक अपने कुल 124 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस अब तक कुल 151 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है।
दोनों ही पार्टियों के भीतर बगावत इस हद तक बढ़ चुकी है कि कई सीटों पर टिकट न मिलने से नाराज नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर नामांकन भरने की तारीख तक बता दी। इसमें कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो अपनी मौजूदा पार्टी से टिकट न मिलने के कारण, किसी और पार्टी में चले गए। कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने तीसरे दल की राह चुन ली है।
भले ही राजनीतिक पार्टियों ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार बदले हों, लेकिन नाराज नेताओं को कोई भी दल पूरी तरह दरकिनार नहीं कर सकता। इसलिए सभी अपने बागियों और नाराज नेताओं को समझाने-बुझाने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। तभी तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने-अपने नाराज नेताओं को मनाने की लिए के सीनियर लीडर की अध्यक्षता में समितियां तक बना डाली। आइए एक नजर डालते हैं, उन सीटों पर जहां बीजेपी और कांग्रेस को अपनों के ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
इन सीटों पर कांग्रेस में बगावत तेज
गंगानगर: यहां से मौजूदा विधायक राजकुमार गौड़ विरोध में उतर आए हैं। क्योंकि 2018 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हालांकि, जीत के बाद उन्होंने कांग्रेस को समर्थन दे दिया। गौड़ को इस बार कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी ने न सिर्फ उन्हें टिकट दिया बल्कि अपने पिछले उम्मीदवार अशोक चांडक को भी दरकिनार कर दिया। कांग्रेस ने इस बार गंगानगर से अंकुर मंगलानी को मैदान में उतारा है। नाराज चांडक ने बगावत कर निर्दलीय नामांकन पत्र भरने की ऐलान कर दिया है।
दौसा: दौसा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस में बगावत अब खुल के सामने आने लगी है। जहां कांग्रेस नेता राधेश्याम नांगल ने दौसा विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का किया ऐलान किया है। कांग्रेस ने मुरारी लाल मीणा को दौसा से प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, मुरारीलाल वर्तमान में दौसा से विधायक हैं और सरकार में मंत्री भी हैं। मुरारी लाल मीणा 2008 में भी दौसा से BSP से विधायक रह चुके हैं। दौसा पर कांग्रेस की पिछली बार जीत हुई थी। इस बार यहां पर स्थिति बदल रही है। क्योंकि, यहां पर गुर्जर वोटर्स कांग्रेस को आंखें दिखा रहे हैं।
बड़सादड़ी: बड़सादड़ी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बद्रीलाल जाट को प्रत्याशी बनाया है। इसके बाद अब विरोध भी शुरू हो गया है। विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और पूर्व प्रत्याशी प्रकाश चौधरी ने पार्टी आलाकमान को टिकट बदलने के लिए 3 नवंबर तक का अल्टिमेटम दिया। टिकट नहीं बदलने पर उन्होंने 4 नवंबर को निर्दलीय के तौर पर नामांकन करने की घोषणा की। इस दौरान प्रकाश चौधरी भावुक भी हो गए। साथ ही उनके समर्थकों ने नारेबाजी की।
महुवा: महुवा में कांग्रेस के टिकट वितरण के विरोध में कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई। साथ ही टिकट वितरण के विरोध में रैली भी निकाली। कांग्रेस ने यहां से ओमप्रकाश हुडला को टिकट दिया। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस हाईकमान को दोबारा विचार कर विधानसभा चुनाव टिकट कांग्रेस कार्यकर्ता को ही दिए जाने की मांग की। बैठक में पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह महुवा ने कहा कि कि महुवा के टिकट को बदलकर धरातल पर कार्य करने वाले कार्यकर्ता को टिकट दिया जाए। दो दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं ने आवेदन किया था, इनमें पार्टी किसी भी एक को टिकट देने पर कार्यकर्ता मान्य करेगा।
कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल
कांग्रेस ने ऐसी ही कई सीटों पर बगावत और विरोध कर रहे नेताओं के शांत करने के लिए एक कमेटी। वरिष्ठ नेता मोहन प्रकाश को इसका जिम्मा सौंपा गया है। इस समीति का काम नाराज नेताओं से बात कर उन्हें मनाने का है। इसके अलावा खुद मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के शीर्ष नेता बगावती नेताओं से मुलाकात कर उन्हें शांत करने की कोशिश करेंगे।
इन सीटों पर नहीं थम रहा बीजेपी का विरोध
झुंझुनू्ं: झुंझुनूं में खुद बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र भाम्बू की बगावत कर रहे हैं। क्योंकि साल 2018 में उन्होंने BJP के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह ओला के सामने हार का सामना करना पड़ा था। बीजेपी ने इसबार उनका टिकट काट कर बबलू चौघरी को दे दिया।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि इस बगावत की नींव आज से लगभग पांच साल पहले ही रखी जा चुकी है। भाम्बू ने झुंझुनूं विधानसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी बबलू चौधरी के सामने निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है।
बस्सी: राजस्थान की बस्सी विधानसभा सीट इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में बनी हुई है। BJP ने रिटायर्ड IAS चंद्र मोहन मीणा को टिकट दिया है। अब बीजेपी नेता जितेंद्र मीना ने बागावत कर दी है। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। वे 4 नवंबर को पर्चा दाखिल करेंगे।
बीते तीन विधानसभा चुनाव की बात करें तो साल 2008 और 2013 में यहां से निर्दलीय अंजू धानका ने जीत दर्ज की थी। साल 2018 में लक्ष्मण मीणा निर्दलीय लड़े और जीत हासिल की। 2008 में 2003 में यहां BJP और कांग्रेस नहीं जीत पाई।
चित्तौड़गढ़: इस सीट से बीजेपी ने दो बार के विधायक चंद्रभान सिंह आक्या का टिकट काट दिया और विधायक नरपत सिंह राजवी को टिकट दिया है। ये विधानसभा क्षेत्र BJP के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। आक्या ने पार्टी की तरफ से टिकट नहीं दिए जाने के लिए सीधे तौर पर जोशी को जिम्मेदार ठहराया है।
पार्टी की तमाम कोशिशों के बाद भी आक्या के बगावती तेवर ठंडे पड़ते दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने और 6 नवंबर को नामांकन भरने का ऐलान कर दिया है।
बीजेपी का डैमेज कंट्रोल
कांग्रेस की तरह ही बीजेपी ने भी नाराज नेताओं के मनाने के लिए पार्टी के भीतर एक कमेटी बनाई है। केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की अध्यक्षता में बनाई गई ये समिति बागियों से बात कर उन्हें मनाएगी। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को चित्तौड़गढ़, भूपेंद्र यादव को तिजारा, तो वसुंधरा राजे को नगर और झोटवाड़ा की जिम्मेदारी दी गई। इन नेताओं से यहां नाराज नेताओं से बात करने के लिए कहा गया है।