तेलंगाना (Telangana Assembly Elections) करीब 9 साल पहले राज्य बना था। विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक बार फिर से राजनीतिक दलों के बीच इसका श्रेय लेने की कोशिश शुरू हो गई है। हाल में महबूबनगर में पालामुरु की रैली में राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा कि तेलंगाना को राज्य का दर्जा दिलाने से जुड़े आंदोलन में वह इस जिले के हर कोने तक गए थे। उनका मकसद लोगों की स्थिति को करीब से समझना था। उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो राज्य को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने राज्य के दर्जा के लिए जयशंकर सहित कई नेताओं की कुर्बानियां जनता को याद दिलाई। उन्होंने कहा कि महबूबनगर सूखे और भूख की वजह से बदहाल था। कृष्णा नदी के इस जिले से गुजरने के बावजूद आंध्र प्रदेश में सत्ता में बैठे लोग राजनीति करते थे। इससे तेलंगाना को नुकसान उठाना पड़ता था।
BRS के लिए तेलंगाना आंदोलन सक्सेस फॉर्मूला
राव ने सिद्दीपेट में कहा कि जो लोग तेलंगाना को राज्य बनाए जाने के खिलाफ थे, उन्होंने बीआरएस के उम्मीदवारों को हराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा कि तेलंगाना आंदोलन की सफलता में सिद्दीपेट की बड़ी भूमिका है। उधर, पॉलिटिकल एनालिस्ट गौरी शंकर ने इंडिया टुडे को बताया कि तेलंगाना आंदोलन टीआरएस (अब बीआरएस) के लिए सफलता के फॉर्मूले की तरह रहा है। राज्य में विधानसभा चुनावों के ऐलान के साथ ही कांग्रेस ने तेलंगाना के राज्य के दर्जे का श्रेय लेने की कोशिश शुरू कर दी थी। उसने इसे चुनाव प्रचार का मुद्दा बना लिया। पिछले महीने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक रैली में कहा था कि कांग्रेस ने तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की है।
राहुल गांधी ने कांग्रेस की पीठ थपथपाई
उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस की वजह से तेलंगाना अलग राज्य बन सका। जिन लोगों ने कुछ नहीं किया है, वे कहते रहते हैं कि उन्होंने देश को आजादी दिलाई। हाल में राज्य के दौरे पर आए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक रैली में कहा कि सोनिया गांधी के समर्थन के बगैर तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा नहीं मिल पाता। उनके इस बयान का बीआरएस ने कड़ी आलोचना की। बीआरएस की एमएलसी के कविता ने कहा कि हमारा आंध्र प्रदेश में जबर्दस्ती विलय करने का काम जवाहरलाल नेहरू ने किया था। उन्होंने हमारी उम्मीदों का कत्ल किया था।
उन्होंने कहा कि दोबारा जब राज्य की जनता ने अलग राज्य की मांग उठाई तो इंदिरा गांधी ने 1969 में फायरिंग में हमारे 369 युवाओं को मरवा दिया। उसके बाद राजीव गांधी ने हमारे मुख्यमंत्री का मजाक उड़ाया, क्योंकि उनका संबंध ओबीसी समुदाय से है। तेलंगाना में राजनीतिक तस्वीर 2000 में बदलनी शुरू हुई, जब कांग्रेस ने अलग राज्य की मांग का समर्थन करना शुरू किया। 2009 में अलग राज्य् के आंदोलन को मजबूती मिली जब केंद्र की यूपीए सरकार ने अलग राज्य की मांग पर विचार करने का भरोसा दिलाया। अब कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनावों में इसका फायदा उठाना चाहती है। उधर, भाजपा भी अलग राज्य के गठन का श्रेय लेने में पीछे नहीं है। उसका कहना है कि अलग राज्य की मांग करने में वह सबसे आगे थी।
राज्य में 30 नवंबर को वोटिंग
तेलंगाना में विधानसभा की कुल 119 सीटे हैं। सभी सीटों पर 30 नवंबर को एक साथ वोटिंग होगी। वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी। 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में केसीआर की बीआरएस 88 सीटे जीतने में सफल हुई थी। कांग्रेस को 21, AIMIM को 7, टीडीपी को 2 और बीजेपी को 1 सीट मिली थी।