दिवाली पर्व को लेकर हर जगह धूम मची हुई है। बाजार रोशनी से नहाया हुआ है। हर तरफ रंग बिरंगी लाइट्स, मूर्तियों से दुकानें सजी हुई हैं। हिंदू धर्म में दिवाली को ‘दीपों की रोशनी’ का पर्व कहा जाता है। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दीपावली मनाई जाती है। इस बार दिवाली की अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3.52 बजे से शुरू होगी। अगले दिन 1 नवंबर को शाम 6.16 बजे इसका समापन होगा। कहते हैं कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की उपासना करने से घर में धन दौलत की बरसात होती है।
दिवाली के दिन सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में धन की देवी माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं। जिन घरों में साफ-सफाई, पूजा-पाठ और मंत्रोचार होता है। वहां पर निवास करने लगती हैं। इसलिए दिवाली की शाम महालक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस बार दीपावली पर क्या है लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त।
घर, दुकान ऑफिस फैक्ट्री में पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में कोई भी व्रत या त्योहार उदया तिथि के आधार पर तय होता है, लेकिन दिवाली पर माता महालक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि को रात्रि में होती है। 31 अक्टूबर को पूरी रात अमावस्या तिथि रहेगी। इसी दिन लक्ष्मी पूजन किया जाता है। इस मौके पर लोग घर, दुकान, ऑफिस और फैक्ट्री में हर जगह पूजा करते हैं। लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न बहुत ही शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है। 31 अक्टूबर को वृषभ लग्न की शुरुआत शाम 06.25 बजे से रात 8.20 तक है। इस तरह से 31 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06.25 बजे से रात 8.20 बजे तक है। इस दौरान दुकान, घर, ऑफिस और फैक्ट्री में पूजा कर सकते हैं।
लक्ष्मी पूजन का दूसरा मुहूर्त
31 अक्टूबर को रात 11.39 बजे से देर रात 12.30 बजे तक दूसा मुहूर्त है। इस दौरान भी पूजा कर सकते हैं।
दिवाली इस बार बहुत ही खास मानी जा रही है। इसकी वजह ये है कि 40 साल बाद इस दिन शुक्र-गुरु की युति से समसप्तक योग बन रहा है। इसके साथ ही शनि अपनी ही स्वराशि कुंभ में विराजमान रहकर शश राजयोग का निर्माण कर रहे हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन विधि
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा को बहुत ही शुभ माना गया है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करके सभी सामग्रियों को एकत्रित करते हुए माता की चौकी स्थापित करें। फिर स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद इस स्वास्तिक के ऊपर कटोरी में चावल रखें और चौकी पर लाल रंग का नया वस्त्र बिछाकर माता लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें।
इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आवहन करते हुए गंगाजल का छिड़काव करते हुए पूजा का संकल्प लें। फिर इसके बाद चौकी पर स्थापित माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव,माता सरस्वती और हनुमान जी को पुष्प, धूप, दीप और दिवाली से जुड़ी सभी पूजा सामग्री का भोग लगाएं। अंत में आरती करें और फिर घर के हर एक हिस्से में दीपक जलाएं और रोशनी, सुख-समृद्धि का पर्व मनाएं।