Maha Kumbh 2025: महाकुंभ मेले में कंप्यूटर बाबा और हिटलर बाबा ने जमाया डेरा, बवंडर बाबा भी सुर्खियों में छाए

Prayagraj Mahakumbh 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। साधु-संतों का जमावड़ा लग गया है। महाकुंभ मेले में साधु और नागा बाबा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इस बीच कंप्यूटर बाबा, बवंडर बाबा और हिटलर बाबा भी महाकुंभ मेले पधार चुके हैं। इनके दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है

अपडेटेड Jan 06, 2025 पर 2:36 PM
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Prayagraj Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेला 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से शुरू होगा। यह 45 दिनों तक चलेगा।

महाकुंभ मेला हिंदूओं का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक मेला है। इस बार साल 2025 में कुंभ मेला लगने वाला है। यह 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा और 25 फरवरी 2025 तक चलेगा। महाकुंभ मेला 45 दिनों तक चलता है। महाकुंभ मेले में दुनियाभर के लोग शामिल होते हैं। जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति की संकल्पना साकार करने को संत और श्रद्धालु डेरा जमाने लगे हैं। अखाड़ों के नागा संत, महामंडलेश्वर हर किसी के आकर्षण का केंद्र हैं। इसबीच कंप्यूटर बाबा, हिटलर बाबा और बवंडर बाबा भी पधार चुके हैं। इनके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई है।

महाकुंभ मेले में बाबाओं के यह अनोखे नाम आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेले में एनवायरमेंट बाबा, चाबी वाले बाबा, हिटलर बाबा, बुलेट वाले बाबा, ट्रंप बाबा के नाम सुनकर लोग हैरान हैं। बाबाओं के ऐसे नाम सुनकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है कि आखिर ये नाम कैसे पड़ गए।

चाबी वाले बाबा का अनोखा अंदाज


महाकुंभ मेले में जब श्रद्धालुओं की नजर चाबी वाले बाबा पर पड़ी तो लोग देखकर हैरान रह गए। उनके गले में 20 किलो की भारी चाबी गले में पड़ी हुई है। चाबी वाले बाबा को कबीरा बाबा के नाम से भी जानते हैं। 50 साल के हरिश्चंद्र विश्वकर्मा जिन्हें चाबी वाले बाबा के नाम से जाना जाता है। हमेशा अपने साथ एक बड़ी और भारी लोहे की चाबी रखते हैं। बाबा का कहना है कि यह चाबी जीवन और अध्यात्म का प्रतीक है। उनके पास एक रथ भी है। जिसमें सिर्फ चाबियां भरी हुई हैं। हर चाबी का अपना एक विशेष इतिहास है। बाबा का कहना है कि इन चाबियों के जरिए वह लोगों को अहंकार के ताले को खोलने का संदेश देते हैं।

एनवायरमेंट बाबा

आवाहन अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरि पूरी दुनिया में कंप्यूटर बाबा के नाम से मशहूर हैं। अगस्त 2016 में बाबा की ओर से वैष्णो देवी से कन्याकुमारी तक 27 लाख पौधे बांटे थे। इस दौरान बाबा पद यात्रा पर निकले थे। अब तक करोड़ों पौधे बांटे जा चुके हैं। इस बार महाकुंभ मेले में उन्होंने 51,000, पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। एनवायरमेंट बाबा हमेशा सोने की माला और अंगूठी पहने रहते हैं। ऐसे ही चांदी का एक धर्म दंड (डंडा) भी साथ में रखते हैँ। कलाइयां इनकी सोने के कड़ों से भरी रहती हैं।

हिटलर बाबा

दिगंबर अखाड़ा के महामंडलेश्वर माधव दास पूरी दुनिया में हिटलर बाबा के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने साल 1992 में प्रयागराज में सन्यास लिया था। उन्हें गुरु रघुवरदास ने माधवदास नाम दिया था। उन्हें जो भी काम दिया जाता था। अपनी मनमर्जी से करते थे। ऐसे में एक दिन उनके गुरु के मुंह से निकल गया “ये तो हिटलर हो गया है”। बस यहीं से माधवदास हिटलर बाबा के नाम से मशहूर हो गए।

ट्रंप बाबा

जगदगुरु बिनैका बाबा के शिविर में ट्रंप बाबा व्यवस्था संभाल रहे हैं। उनका असली नाम कंचनदास जी महाराज है। लेकिन वो ट्रंप बाबा के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने साल 2004 में एम.कॉम की डिग्री हासिल की थी। वो फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करते हैं। कंचनदास की कद काठी कुछ डोनाल्ड ट्रंप की तरह है। ऐसे में लोग उन्हें ट्रंप बाबा के नाम जानने लगे।

कंप्यूटर बाबा सुर्खियों में छाए

दिगंबर अनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर नामदेव दास उर्फ कंप्यूटर बाबा की अलग धाक जमी हुई है। उन्हें कंप्यूटर के बारे में काफी ज्ञान हैं। ऐसे में लोग उन्हें कंप्यूटर बाबा के नाम पुकारने लगे। वो अपने बयानों में भी सुर्खियों में रहते हैं। हर मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं।

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