Maha Kumbh Mela 2025: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी, 2025 तक दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक 'महाकुंभ मेला' आयोजित किया जाएगा। गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के पवित्र संगम पर लाखों श्रद्धालुओं के आशीर्वाद प्राप्त करने और पवित्र स्नान करने के लिए इस उत्सव में शामिल होने की उम्मीद है। महाकुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सहूलियत और आवागमन को ध्यान में रखते हुए पीपा पुलों की संख्या बढ़ा दी गई है। साल 2019 के कुंभ मेले में जहां 22 पीपा पुल थे। वहीं, इस बार इन पुलों की संख्या बढ़ाकर 30 कर दिया गया है। गंगा नदी पर बनाए जा रहे इन 30 पांटून पुलों की निर्माण प्रक्रिया अब तक की सबसे बड़ी संख्या में की जा रही है।
इस बीच, प्रयागराज में संगम पर बड़ा बदलाव किया गया है। दरअसल, महाकुंभ में पहली बार गंगा नदी एक धार में बहती हुई दिखाई देगी। दैनिक भास्कर के मुताबिक, प्रयागराज में गंगा नदी पहले तीन धारों से होकर संगम तक पहुंचती थी। लेकिन इस बार गंगा की धारा को एक कर दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा नदी के बीच में अक्सर टापू बन जाते हैं। इसका कोई इस्तेमाल अभी तक नहीं हो पाता था, लेकिन इस महाकुंभ में सिंचाई विभाग ने IIT गुवाहाटी की मदद लेकर बड़ा बदलाव किया है। समुद्र में खुदाई करने वाली मशीनों से इन टापू को हटाया गया और गंगा की धारा को एक कर दिया गया।
इस प्रक्रिया से न सिर्फ गंगा की धारा एक हुई, बल्कि महाकुंभ मेले का एरिया भी बढ़ गया। करीब 87 बीघा जमीन पहले पानी से डूबी रहती थी। लेकिन इस बार मेले के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा। यह मेले की सबसे महत्वपूर्म जगह होगी। संगम एरिया में एंट्री करते ही पहले गंगा नदी नजर आ जाती थी, लेकिन इस बार करीब 500 मीटर तक खाली मैदान नजर आ रहा है।
हालांकि, इस बदवाल को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। अखिलेश ने X पर लिखा, "इतिहास गवाह रहा है कि नदियाँ अपने मार्ग को स्वयं बनाकर चलती हैं। ये प्राकृतिक बहाव नदियों की निरंतरता के लिए, अपने आप बनाया हुआ रास्ता होता है। इस भौगोलिक सत्य को स्वीकार करते हुए, नदियों के बहाव से छेड़छाड़ करना पर्यावरणीय अपराध है।"
उन्होंने आगे कहा, "प्रयागराज महाकुंभ में गंगा जी में ड्रेजर मशीन लगाने का मकसद केवल अपने लोगों को ठेका देना और उनके जरिए भ्रष्टाचार से पैसा कमाना है। नदियां किस जगह आकर मिलेंगी, ये प्रकृति पर छोड़ देना चाहिए, उसके लिए मनमानी करना और जबरदस्ती करके बहाव को बदलना अनुचित भी है और अवांछनीय भी। ऐसा करने से गंगा जी के जल-जीव-जंतु की जैविकी और प्राकृतिक पारिस्थितिक संतुलन पर बुरा असर होगा।"
प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण हिंदू उत्सव में लाखों श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्नान करने आते हैं, जहां यमुना, गंगा और प्रसिद्ध सरस्वती नदियां मिलती हैं। महाकुंभ मेले को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। इसमें दुनिया भर से तीर्थयात्री यमुना, सरस्वती और गंगा नदियों के पवित्र संगम में स्नान करने के लिए प्रयागराज आते हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 13 जनवरी 2025 से शुरू होने वाला महाकुंभ 2025 नदी किनारे 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। इसमें कम से कम 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जिस पर लगभग 6,382 करोड़ रुपये खर्च होंगे।