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Maha Kumbh 2025: पहली बार एक धार में बहती हुई दिखेगी गंगा, पहले तीन धारों से होकर पहुंचती थी संगम, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

Maha Kumbh Mela 2025: भारत के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक प्रयागराज ऐतिहासिक महाकुंभ मेले के लिए लगातार तैयारियों में जुटा हुआ है, जो 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा। हिंदुओं के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखने वाला यह त्योहार 144 साल बाद भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है

Akhileshअपडेटेड Jan 08, 2025 पर 2:03 PM
Maha Kumbh 2025: पहली बार एक धार में बहती हुई दिखेगी गंगा, पहले तीन धारों से होकर पहुंचती थी संगम, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
Maha Kumbh Mela 2025: महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा

Maha Kumbh Mela 2025: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी, 2025 तक दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक 'महाकुंभ मेला' आयोजित किया जाएगा। गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के पवित्र संगम पर लाखों श्रद्धालुओं के आशीर्वाद प्राप्त करने और पवित्र स्नान करने के लिए इस उत्सव में शामिल होने की उम्मीद है। महाकुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सहूलियत और आवागमन को ध्यान में रखते हुए पीपा पुलों की संख्या बढ़ा दी गई है। साल 2019 के कुंभ मेले में जहां 22 पीपा पुल थे। वहीं, इस बार इन पुलों की संख्या बढ़ाकर 30 कर दिया गया है। गंगा नदी पर बनाए जा रहे इन 30 पांटून पुलों की निर्माण प्रक्रिया अब तक की सबसे बड़ी संख्या में की जा रही है।

इस बीच, प्रयागराज में संगम पर बड़ा बदलाव किया गया है। दरअसल, महाकुंभ में पहली बार गंगा नदी एक धार में बहती हुई दिखाई देगी। दैनिक भास्कर के मुताबिक, प्रयागराज में गंगा नदी पहले तीन धारों से होकर संगम तक पहुंचती थी। लेकिन इस बार गंगा की धारा को एक कर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा नदी के बीच में अक्सर टापू बन जाते हैं। इसका कोई इस्तेमाल अभी तक नहीं हो पाता था, लेकिन इस महाकुंभ में सिंचाई विभाग ने IIT गुवाहाटी की मदद लेकर बड़ा बदलाव किया है। समुद्र में खुदाई करने वाली मशीनों से इन टापू को हटाया गया और गंगा की धारा को एक कर दिया गया।

इस प्रक्रिया से न सिर्फ गंगा की धारा एक हुई, बल्कि महाकुंभ मेले का एरिया भी बढ़ गया। करीब 87 बीघा जमीन पहले पानी से डूबी रहती थी। लेकिन इस बार मेले के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा। यह मेले की सबसे महत्वपूर्म जगह होगी। संगम एरिया में एंट्री करते ही पहले गंगा नदी नजर आ जाती थी, लेकिन इस बार करीब 500 मीटर तक खाली मैदान नजर आ रहा है।

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