महाकुंभ मेला हिंदूओं का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक मेला है। साल 2025 के प्रयागराज में महाकुम्भ मेला लगने वाला हैं। यह 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा और 25 फरवरी 2025 तक चलेगा। महाकुंभ मेला 45 दिनों तक चलता है। इसके लिए उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, श्रद्धालु अपनी तीर्थ यात्रा की तैयारी में लगे हैं। इस बीच संगम नगरी प्रयागराज में साधु-संतों का आवागमन शुरू हो गया है। श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़े ने रविवार को पूरे शाही अंदाज में कुंभ क्षेत्र में अपनी छावनी में प्रवेश किया।
घोड़े, रथ और बग्घियों पर सवार होकर ढोल-नगाड़े और शंख की विजय ध्वनि के साथ संत छावनी तक पहुंचे। संतों के अद्भुत रूप और वैभव को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर शहर वासियों की भीड़ जुटी रही। इस दौरान आगे चल रहे नागा संन्यासियों ने अनोखे करतब दिखाए। महंत और मालामंडलेश्वरों समेत दर्जनों साधु-संतों की सुरक्षा में कुंभ मेला प्रशासन ने कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
नागा साधुओं ने दिखाए करतब
रास्ते में साधु-संत भाला, त्रिशूल और तलवार के साथ करतब दिखाते हुए चल रहे थे। डीजे और बाजा की धुन पर संतों ने जमकर नृत्य किया। शरीर पर भस्म भूभूति के साथ चंदन और विभूति तिलक लगाकर साधु संतों का जत्था हर-हर महादेव के नारे लगा रहे थे। पूरी संगम नगरी में नारे गूंज रहे थे। तमाम जटाजूट संत छावनी यात्रा में आकर्षण का केंद्र रहे। यात्रा के मद्देनजर होने वाले यातायात रूट परिवर्तन के संबंध में प्रशासन की ओर से शनिवार को ही एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। इसके साथ वैकल्पिक मार्गों के बारे में लोगों को जानकारी दे दी थी। छावनी प्रवेश के दौरान अखाड़े के साधु-संत अपने नए बने अखाड़ा भवन मड़ौका आश्रम से निकलकर मड़ौका मार्ग होकर पुराना रीवा मार्ग से डांडी तिराहा पहुंचे।
प्रवेश यात्रा में गूंजे ' वृक्ष लगाओ , सृष्टि बचाओ ' के नारे
प्रवेश यात्रा में सबसे आगे अखाड़े के देवता भगवान गजानन की का रथ था। इसके बाद अखाड़े के पंच परमेश्वर रमता पंच था। इसके बाद अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर का रथ चल रहा था। प्रवेश यात्रा में संतों की तरफ से वृक्ष लगाओ, सृष्टि बचाओ के नारे लगाए जा रहे थे। अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरी जी का कहना है कि उनके अखाड़े का मूल मकसद सनातन का प्रचार प्रसार और धर्म की रक्षा करना है।