Mahakumbh 2025: प्रयागराज में 13 जनवरी से लगने वाले महाकुंभ की प्रमुख स्नान को बाधित करने की धमकियों वाला एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें आवाज सिख अलगाववादी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की बताई जा रही है। उसने वीडियो में महाकुंभ को निशाना बनाने की कथित तौर पर धमकी दी है। अखाड़ा परिषद ने सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू को समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश को लेकर बुधवार को आड़े हाथों लिया। उसने एक वीडियो में महाकुंभ को निशाना बनाने की कथित तौर पर धमकी दी है।
सोमवार को पीलीभीत में उत्तर प्रदेश और पंजाब पुलिस के साथ मुठभेड़ में खालिस्तानी जिंदाबाद फोर्स के तीन आतंकवादी मारे गए जिसके बाद महाकुंभ में प्रमुख स्नान तारीखों- 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 29 जनवरी (मौनी अमावस्या) और तीन फरवरी (बसंत पंचमी) को बाधित करने की धमकी देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इस वीडियो में आवाज खालिस्तान समर्थक पन्नू की बताई जा रही है।
पन्नू प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस का सरगना है और उसे भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया है। महाकुंभ नगर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा, "पन्नू नाम का जो व्यक्ति है, अगर कहीं ये हमारे महाकुम्भ में आया तो इसे मार-मारकर भगाया जाएगा। हमने ऐसे पागल सैकड़ों की संख्या में देखे हैं।"
उन्होंने पीटीआई से बातीचीत में आगे कहा, "यह महाकुंभ का मेला है। जितने भी सिख और हिंदू हैं, सभी एक हैं। पन्नू ने आपस में विभाजन कराने वाली जो बात की है, वह उचित नहीं है। सिख समाज ने ही सनातन धर्म को बचाए रखा है।"
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा, "हमारे यहां नागा साधुओं की तरह उनके (सिखों के) यहां भी नागा साधु होते हैं। ये दोनों एक ही हैं और सनातन के सैनिक हैं। इसलिए हम इन पागलों को अधिक गंभीरता से नहीं लेते।"
उन्होंने कहा कि पन्नू की बातों को अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि वह हमेशा ही ऐसी भाषा का प्रयोग करता है। इससे देश में विभाजन पैदा हो तथा वह हमेशा से ही सनातन धर्म पर हमला करने का प्रयास करता रहा है।
महंत रवींद्र पुरी ने कहा, "आपने देखा होगा कि हमारे तीन अखाड़े- बड़ा उदासीन अखाड़ा, नया अखाड़ा उदासीन और निर्मल अखाड़ा पंजाब से हैं जहां सिद्ध साधु महात्मा है। इसलिए हम ऐसे उग्रवादी को गंभीरता से नहीं लेते हैं।"
हिंदू धर्म में महाकुंभ मेले का बहुत महत्व है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है। 2025 में महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी को समाप्त होगा। महाकुंभ की शुरुआत पौष पूर्णिमा स्नान से होती है और महाशिवरात्रि पर अंतिम स्नान के साथ समाप्त होती है। इस साल महाकुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित किया जाएगा। समुद्र मंथन के दौरान, जब देवता और दानव अमृत कलश के लिए संघर्ष कर रहे थे, तो अमृत की कुछ बूंदें 12 स्थानों पर गिरी थीं, जिनमें से चार पृथ्वी पर और आठ स्वर्ग में थीं।
पृथ्वी पर वे चार स्थान जहां अमृत गिरा, वे हैं प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। ऐसा कहा जाता है कि अमृत की बूंदें उज्जैन में शिप्रा, प्रयागराज में संगम, हरिद्वार में गंगा और नासिक में गोदावरी नदियों में गिरी थीं। यही कारण है कि इन स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है।