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Pongal 2025: 4 दिन का पोंगल पर्व आज से शुरू, फसल से है गहरा नाता, जानिए महत्व और पूजा विधि

Pongal 2025: पोंगल दक्षिण भारत का चार दिवसीय प्रमुख त्योहार है। साल 2025 में 14 से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा। यह नई फसल, सूर्य देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। भोगी, सूर्य, मट्टू और कन्नुम पोंगल पर अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। यह त्योहार से परिश्रम और प्रकृति के महत्व के बारे में जानकारी मिलती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 13, 2025 पर 12:31 PM
Pongal 2025: 4 दिन का पोंगल पर्व आज से शुरू, फसल से है गहरा नाता, जानिए महत्व और पूजा विधि
Pongal 2025: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने की इस घटना को दक्षिण भारत में पोंगल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

14 जनवरी से पोंगल का शुभारंभ हो रहा है, जो दक्षिण भारत का प्रमुख त्योहार है। यह खासतौर पर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मनाया जाता है, लेकिन अब इसे भारत के अन्य हिस्सों में भी धूमधाम से मनाया जाने लगा है। दक्षिण भारत में इसे नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। जिस समय उत्तर भारत में मकर संक्रांति और लोहड़ी का उत्सव होता है, ठीक उसी समय दक्षिण भारत पोंगल के रंग में रंगा होता है।पोंगल चार दिनों का पर्व है, जिसका तमिल में अर्थ है "उबालना।"

यह नए साल और नई फसल की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन गुड़ और चावल से बनी खीर सूर्य देवता को चढ़ाई जाती है, जिसे पोंगल कहा जाता है। यह त्योहार वर्षा, धूप और कृषि से जुड़े तत्वों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सुंदर अवसर है।

पोंगल 2025: तारीखें और महत्व

इस साल पोंगल का पर्व 14 से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा। चार दिन के इस त्योहार में हर दिन की अलग परंपराएं और खासियतें होती हैं।

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