Som Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव की विशेष पूजा से मिलेगी समृद्धि, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Som Pradosh Vrat 2025: सोम प्रदोष व्रत, भगवान शिव की पूजा का विशेष दिन है, जो जीवन में समृद्धि और शांति लाता है। यह व्रत माघ माह की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है

अपडेटेड Jan 22, 2025 पर 3:32 PM
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Som Pradosh Varat 2025: प्रदोष व्रत विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है।

भगवान शिव की पूजा का महत्व हर दिन है लेकिन प्रदोष तिथि पर विशेष पूजा करने से जीवन में अपार सुख, समृद्धि और शांति मिलती है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है जो कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में होती है। यह दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए माना जाता है। प्रदोष तिथि पर भगवान शिव की पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यदि यह तिथि सोमवार को पड़े तो इसे और भी विशेष माना जाता है क्योंकि सोमवार और प्रदोष दोनों ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अत्यधिक शुभ माने जाते हैं।

इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, मानसिक शांति मिलती है और समृद्धि का मार्ग खुलता है। प्रदोष व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लाने में सहायक है।

सोम प्रदोष व्रत 2025 की तारीख और समय


2025 में सोम प्रदोष व्रत माघ माह की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को 27 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा। यह तिथि रात 8:54 बजे 26 जनवरी को शुरू होगी और 27 जनवरी को रात 8:34 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय शाम 5:56 बजे से लेकर 8:34 बजे तक होगा। इस समय के बीच पूजा करनी चाहिए।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक दूध से करने से नकारात्मकता और भय दूर होते हैं। मन और आत्मा की शुद्धि होती है। साथ ही यह दिन समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। सोम प्रदोष व्रत पर किए गए कर्मों का असर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

सोम प्रदोष व्रत का शुभ योग

इस दिन विशेष रूप से मूल नक्षत्र और हर्षण योग बनेगा जो पूजा और व्रत को और भी प्रभावशाली बनाता है। सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा धनु राशि में होगा, जो विशेष रूप से शुभ है। हालांकि, राहु काल सुबह 8:32 बजे से 9:53 बजे तक रहेगा, इसलिए इस समय पूजा न करें।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि को सही तरीके से निभाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले पूजा के लिए एक स्वच्छ स्थान तैयार करें और भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर रखें। फिर गंगाजल से भगवान शिव की मूर्ति को स्नान कराएं। पूजा में अक्षत (चावल), बेलपत्र, चंदन, फूल, फल, भांग, शहद, अगरबत्ती और दीपक अर्पित करें। इसके बाद, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में भगवान शिव से प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार और संतान की सुख-समृद्धि में वृद्धि करें।

सोम प्रदोष व्रत के लाभ

इस व्रत को करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार होता है। यह व्रत पितृ दोष, मानसिक अशांति और शारीरिक पीड़ा को दूर करता है। साथ ही यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।

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