Adani-Hindenburg मामले में SC ने फैसला रखा सुरक्षित, कहा- 'मीडिया रिपोर्ट के आधार पर SEBI नहीं कर सकता जांच'

Adani-Hindenburg Case: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंड बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) को सिर्फ मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किसी चीज की जांच करने के लिए नहीं कहा जा सकता है। देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार 24 नवंबर को अदाणी-हिंडनबर्ग मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये कहा। सीजेआई ने यह भी कहा कि इस मामले में SEBI की जांच की विश्वसनीयता पर संदेह करने के लिए कोई आधार या सबूत नहीं है

अपडेटेड Nov 24, 2023 पर 7:49 PM
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सीजेआई चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण के आरोपों के बाद आया है

Adani-Hindenburg Case: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंड बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) को सिर्फ मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किसी चीज की जांच करने के लिए नहीं कहा जा सकता है। देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार 24 नवंबर को अदाणी-हिंडनबर्ग मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये कहा। सीजेआई ने यह भी कहा कि इस मामले में SEBI की जांच की विश्वसनीयता पर संदेह करने के लिए कोई आधार या सबूत नहीं है। सीजेआई ने साफ किया कि वह किसी भी मीडिया आउटलेट की प्रामाणिकता को बदनाम नहीं कर रहे हैं, लेकिन मीडिया रिपोर्टें SEBI की जांच की तरह, जांच के योग्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सीजेआई चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण के उन आरोपों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि SEBI ने कुछ मीडिया संस्थानों की ओर से अदाणी के बारे में छापी गई आपत्तिजनक खबरों पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। भूषण ने यह भी आरोप लगाया था कि अगर मीडिया ग्रुप को अदाणी ग्रुप के खिलाफ डॉक्यूमेंट्स मिल सकता है, तो SEBI भी इसे आसानी से हासिल कर कर सकता है।

चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों को भी चेतावनी दी कि वे जिम्मेदार बनें और इस तरह के मामलों में अदालत से तभी उचित अनुरोध करें जब उनके पास सबूत हों। उन्होंने कहा, "वकील होने के नाते, आप जो पूछ रहे हैं, उसके प्रति आपको जिम्मेदार होना चाहिए। यह कोई स्कूल की बहस नहीं है। आप सुप्रीम कोर्ट से बिना किसी सबूत के SEBI और LIC के खिलाफ जांच का आदेश देने की मांग कर रहे हैं? क्या आप जानते हैं कि इसके नतीजे क्या होंगे?"


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प्रशांत भूषण ने यह भी आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट ने अदाणी-हिंडनबर्ग मामले की जांच के लिए जो कमेटी बनाई है, उसके कुछ सदस्यों पर हितों के टकराव मामला बनता है।

उन्होंने खास तौर से वकील सोमशेखर सुंदरसन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह 2006 में अडानी की ओर से SEBI के खिलाफ पेश हुए थे। इस पर जवाब देते हुए सीजेआई ने कहा, "थोड़ा निष्पक्ष रहें। वह एक वकील के रूप में पेश हुए थे। आप सिर्फ इसलिए हितों के टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं क्योंकि वह 2006 में अडानी की ओर से पेश हुए थे? जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए।"

सुंदरसन को 23 नवंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया गया। सीजेआई ने आगे कहा कि सेबी ने सुप्रीम कोर्ट की एक्सपर्ट् कमेटी के सदस्यों का चयन नहीं किया है। उन्होंने कहा, "यह कमेटी के लिए बहुत अनुचित है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग हमारी ओर से नियुक्ति समितियों में काम नहीं करेंगे।"

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