बदलाव के दौर से गुजर रही एयर इंडिया, टाटा समूह के लिए सिर्फ एक कारोबारी अवसर नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। बदलाव चुनौतीपूर्ण है लेकिन जरूरी है। यह बात टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने जेआरडी टाटा की 121वीं जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम में कही। चंद्रशेखरन के मुताबिक, विमानन क्षेत्र लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है। सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं के कारण पुर्जों, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए फ्लीट की उपलब्धता काफी अनिश्चित हो गई है।
उन्होंने कहा, "आप जो भी योजना बनाते हैं, वह इस क्षेत्र में सामने आने वाली स्थितियों के कारण कठिन होती जा रही है।" यह भी उल्लेख किया कि एविएशन, बेहद ज्यादा पूंजी की जरूरत वाला कारोबार है। इसमें फायदे भी कम होते हैं। चंद्रशेखरन के मुताबिक, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि टाटा समूह के लिए एयर इंडिया केवल एक कारोबारी अवसर नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है।"
जनवरी 2022 में टाटा की हुई थी Air India
टाटा समूह ने जनवरी 2022 में घाटे में चल रही एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की भारत सरकार से खरीद कंप्लीट की थी। तब से समूह एक महत्वाकांक्षी 5-वर्षीय ट्रांसफॉरमेशन प्लान पर काम कर रहा है। हालांकि, कई कारणों से प्रगति उम्मीद से धीमी रही है। जेआरडी टाटा ने साल 1932 में एयर इंडिया को टाटा एयरलाइंस के नाम से शुरू किया था। इसके बाद 1953 में एयर इंडिया समेत 11 विमानन कंपनियों का राष्ट्रीयकरण हो गया। लिहाजा एयर इंडिया सरकारी कंपनी बन गई। लेकिन अब यह फिर से प्राइवेट कंपनी है और वापस टाटा समूह के ही पास है।
GDP में 1 प्रतिशत की ग्रोथ मतलब एविएशन सेक्टर में 2 प्रतिशत की ग्रोथ
देश के एविएशन सेक्टर की क्षमता पर जोर देते हुए, चंद्रशेखरन ने कहा कि GDP में हर एक प्रतिशत की ग्रोथ से घरेलू एविएशन सेक्टर को 2 प्रतिशत की ग्रोथ मिलेगी। चंद्रशेखरन के मुताबिक, "भारत 8 प्रतिशत बढ़ता है, तो एविएशन इंडस्ट्री 16 प्रतिशत बढ़ती है। और यह खेल चलता रहेगा, और लंबे समय तक चलता रहेगा, कम से कम अगले 3 दशकों तक। तो यह आर्थिक ग्रोथ का एक बहुत ही रोमांचक दौर होने वाला है, खासकर एविएशन सेक्टर के लिए।"