भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन अखिल गुप्ता रिटायर होने जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो अखिल गुप्ता इस साल 31 मार्च को रिटायर होने जा रहे हैं। वे पिछले 30 से ज्यादा सालों से ग्रुप की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के साथ भारती ग्रुप में उनके लंबे और सफल सफर का अंत होगा। कंपनी के विस्तार और मजबूती में उनका योगदान काफी अहम माना जाता है। भारती एंटरप्राइजेज ने हाल ही में एक आंतरिक ईमेल के जरिए उनके रिटायरमेंट की औपचारिक जानकारी दी है।
मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, अखिल गुप्ता ने निजी रुचियों पर ध्यान देने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है। बीते कुछ समय से उनकी रोज़मर्रा के कामों में सक्रियता भी धीरे-धीरे कम हो रही थी। इससे पहले वह 9 जुलाई 2025 को एयरटेल अफ्रीका पीएलसी में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद से भी रिटायर हो चुके हैं। बता दें कि, मनीकंट्रोल इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया के लिए उनसे संपर्क नहीं कर पाया।
अखिल गुप्ता की बड़ी भूमिका
भारती ग्रुप की कोर लीडरशिप में शामिल रहे अखिल गुप्ता ने लंबे समय तक कंपनी को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई। अलग-अलग नियमों में बदलाव, स्पेक्ट्रम नीलामी और टेलीकॉम सेक्टर में आए उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने भारती एयरटेल की रणनीति तय करने में अहम योगदान दिया। इसी वजह से एयरटेल एक छोटी मोबाइल कंपनी से आगे बढ़कर वैश्विक टेलीकॉम कंपनी बनी और भारत के डिजिटल ढांचे को मजबूत करने में मदद मिली। अखिल गुप्ता भारती एंटरप्राइजेज के शुरुआती दौर में ही ग्रुप से जुड़ गए थे। टेलीकॉम बिजनेस को शुरू से खड़ा करने और उसे आगे बढ़ाने में वे शुरू से ही सक्रिय रूप से शामिल रहे।
1995 से 2000 के बीच अखिल गुप्ता ने भारती ग्रुप के मोबाइल टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। उस दौर में भारत का टेलीकॉम सेक्टर काफी सख्त नियमों के तहत चलता था। ऐसे में उन्होंने लाइसेंस से जुड़ी योजना, सरकारी और रेगुलेटरी संस्थाओं से बातचीत, और शुरुआती नेटवर्क बिछाने जैसे कामों पर खास ध्यान दिया। 2000 के दशक की शुरुआत में, एक वरिष्ठ अधिकारी और बोर्ड सदस्य के तौर पर उन्होंने भारती एयरटेल को देश का सबसे बड़ा मोबाइल ऑपरेटर बनाने में मदद की। इस दौरान लगातार होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी, टैरिफ को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा और बड़े नीतिगत बदलावों को संभालने में उनकी भूमिका अहम रही। इसके अलावा, 2002 में हुए एयरटेल के आईपीओ में भी उनका बड़ा योगदान रहा, जो भारत के शुरुआती टेलीकॉम आईपीओ में गिना जाता है।
अफ्रीका में किया विस्तार
2010 में अखिल गुप्ता, एयरटेल द्वारा ज़ैन अफ्रीका के 10.7 अरब डॉलर के अधिग्रहण से जुड़ी लीडरशिप टीम का अहम हिस्सा थे। यह सौदा किसी भारतीय कंपनी का उस समय का सबसे बड़ा विदेशी अधिग्रहण माना गया। इसी कदम से भारती एयरटेल अफ्रीका में मजबूत मौजूदगी वाली एक मल्टीनेशनल टेलीकॉम कंपनी बन पाई। इसके बाद के सालों में उन्होंने एयरटेल को कई मुश्किल हालात से बाहर निकालने में भी बड़ी भूमिका निभाई। इसमें 2G लाइसेंस रद्द होना, स्पेक्ट्रम से जुड़े बदलाव और बढ़ते नियम-कानूनों का दबाव शामिल था। लंबे समय तक चले इंडस्ट्री के तनाव के दौर में कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने में भी उनका योगदान अहम रहा।
चार्टर्ड अकाउंटेंट की ट्रेनिंग लेने वाले और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से पढ़े अखिल गुप्ता, भारती ग्रुप की बड़ी संरचनात्मक योजनाओं से भी जुड़े रहे। इनमें मोबाइल टावर जैसे पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग करना और इंडस टावर्स की स्थापना शामिल है। इन फैसलों ने भारत के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर ही बदल दी।
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