फिनटेक स्टार्टअप भारतपे (BharatPe) के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) और कंपनी के बोर्ड के बीच विवाद गहराता दिख रहा है। अशनीर ने आरोप लगाया है कि बोर्ड उन्हें जबरदस्ती कंपनी से बाहर निकालना चाहता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे उन्हें कंपनी से बाहर करना चाहते हैं तो उन्हें उनकी हिस्सेदारी के बदले में 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। हालांकि इस मामले से वाकिफ कई सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक BharatPe का बोर्ड अशनीर के इस मांग को स्वीकार नहीं करने वाला है। वहीं ग्रोवर बिना "पर्याप्त मुआवजे" के कंपनी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में अब यह मामला कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है।
अशनीर भी इस कानूनी लड़ाई के लिए तैयार दिख रहे हैं और उन्होंने कंपनी से हमेशा के लिए बाहर निकलने के बढ़ते दबाव के बीच तीन बड़ी लॉ फर्मों को हायर किया है। इन लॉ फर्मों में नई दिल्ली स्थित लॉ फर्म करांजावाला एंड कंपनी भी शामिल है।
ग्रोवर पिछले महीने कोटक के एक एम्प्लॉयी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के बाद उठे विवाद और कंपनी के जहरीले वर्क कल्चर व कामकाज के तरीकों पर उठे सवालों के बाद 31 मार्च तक छुट्टी (अबसेंस ऑफ लीव) पर चले गए थे। बाद में उनकी पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर भी पिछले हफ्ते छुट्टी पर चली गईं।
वहीं दूसरी तरफ बोर्ड ने कंपनी की फॉरेंसिक ऑडिट के लिए अल्वारेज एंड मार्शल और पीडब्यूसी को नियुक्ति किया, जिसे कंपनी के कामकाज और गवर्नेंस के तरीकों को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपनी हैं। इन ऑडिटो फर्मों की प्रारंभिक जांच में रिक्रूटमेंट और पेमेंट्स को लेकर कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आने की खबर हैं।
मामले से वाकिफ एक व्यक्ति ने बताया ग्रोवर ने इसलिए लॉ फर्म को हायर किया है क्योंकि उन्हें यह एहसास हो गया कि बोर्ड उनकी हजारों करोड़ रुपये की भारी-भरकम मांग को नहीं मानने वाला है। वहीं एक दूसरे शख्स ने बताया, "ग्रोवर कंपनी को छोड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन वे अपने शेयरों पर अपना हक बनाए रखना चाहते थे। हालांकि बोर्ड उन्हें बिना किसी पर्याप्त मुआवजे के बाहर निकालना चाहता है।"
एक व्यक्ति ने कहा कि ग्रोवर ने एक कानूनी फर्म को काम पर रखा क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि बोर्ड कई मिलियन डॉलर के समझौते की उनकी मांग से सहमत नहीं होगा। "वह (ग्रोवर) छोड़ना चाहता था, लेकिन अपने शेयरों पर पकड़ बना रहा था ... लेकिन बोर्ड उसे बिना वेतन के बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है।"
अशनीर ग्रोवर ने इससे पहले मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह उसी स्थिति में कंपनी छोड़ेंगे जब एक इनवेस्टर कंपनी की 6 अरब डॉलर की वैल्युएशन पर उनकी 9.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगा। ग्रोवर ने कहा, “मैंने ऐसा क्या किया है जो इस्तीफा दूं? यह तो जांच से पहले सजा देने जैसी बात है। मैं मैनेजिंग डायरेक्टर हूं। मैं कंपनी चलाता हूं। यदि बोर्ड को लगता है कि मुझे एमडी बने रहने की जरूरत नहीं है और किसी और को कंपनी चलानी चाहिए तो प्लीज मेज पर 4,000 करोड़ रुपये रखें और मुझे कंपनी से बाहर जाने दीजिए।”