फलों का राजा कहे जाने वाला आम गर्मियों की शुरूआत होते ही चर्चा का विषय बन जाता है। आम की डिमांड केवल देश ही नहीं विदेशों में भी देखने को मिल रही है। अमेरिका में इन दिनों भारतीय आमों को लेकर एक अलग ही जुनून देखने को मिल रहा है। इसे महज एक फल नहीं, बल्कि एक 'सांस्कृतिक कार्यक्रम' और 'लक्जरी ऑब्सेशन' के रूप में देखा जा रहा है। यहीं वजह है कि भारत से आम का निर्यात बड़े स्तर पर किया जाता है।
अमेरिका में भारतीय आमों का सीजन शुरू होते ही लोग फ्लाइट्स ट्रैक करने लगते हैं और डिलीवरी अपडेट्स के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स पर सक्रिय हो जाते हैं। लोग वेयरहाउस पार्किंग लॉट्स तक दौड़ रहे हैं ताकि उन्हें अपना 'एडिबल येलो गोल्ड' (खाद्य पीला सोना) मिल सके।
भारतीय मूल के लोगों के बीच मजबूत मांग और पहले से बने हुए व्यापारिक संबंधों के कारण वहां भारतीय आमों की मांग काफी हाई है। भारतीय आमों का सीजन मार्च के अंत से शुरू होकर जुलाई तक चलता है। मांग इतनी अधिक है कि भारत से पहली खेप निकलने से पहले ही प्री-ऑर्डर्स बुक हो जाते हैं।
बताते चले कि भारत दुनिया के कुल आम उत्पादन का 40% से 50% हिस्सा यानी सालाना 20 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा पैदा करता है । हालांकि, इस भारी उत्पादन का केवल 1% ही निर्यात किया जाता है, जिससे विदेशों में इसकी कमी इसे एक लक्जरी आइटम बना देती है।
$500 से $2,000 के बीच बिक रहें आम
अमेरिका में आम खरीदना एक 'प्रीमियम सब्सक्रिप्शन अनुभव' बन गया है। विक्रेता 'मैंगो पास' ऑफर के तहत आम की खरीद कर रहे है। जिनकी कीमत $500 से $2,000 (लगभग 42,000 से 1.6 लाख रुपये) के बीच है। इसमें एयर फ्रेट और निरीक्षण लागत शामिल होती है। वहीं स्टोर में 10 से 12 आमों के एक बॉक्स की कीमत $50 से $60 के बीच है, जो पिछले साल के $40-$45 के मुकाबले काफी अधिक है। इसका कारण ईरान युद्ध से जुड़ी हवाई माल ढुलाई लागत और टैरिफ अनिश्चितता को माना जा रहा है।
कौन से क्यों भारतीय आम बन रहे विदेशों की पहली पसंद
बेहतर पैकहाउस सुविधाओं, कड़े क्वालिटी चेक और तेज एयर कार्गो कनेक्टिविटी के चलते भारतीय आम की पहुंच नए देशों तक बढ़ रही है। निर्यातक और बागवान अब वेपर हीट ट्रीटमेंट, जीआई टैगिंग और ट्रेसेबिलिटी पर जोर देकर ‘प्रोड्यूस ऑफ इंडिया’ ब्रांड को मजबूत कर रहे हैं, जिससे भारतीय आम स्वाद, खुशबू और भरोसे के दम पर दुनिया भर के सुपरमार्केट और डाइनिंग टेबल तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
महाराष्ट्र का हापुस (Alphonso) और गुजरात का केसर अमेरिका में सबसे पसंदीदा किस्में हैं।इसके अलावा दक्षिण भारत का बंगनपल्ली, तोतापुरी और उत्तर भारत का दशहरी भी मांग में हैं।
क्या कहते है एक्सपोर्ट के आंकड़े
2024 में अमेरिका को भारतीय आम का निर्यात लगभग $10 मिलियन रहा था। APEDA Agri Exchange के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में यूके ने 4,367 MT आमों का आयात किया था। इसकी मुख्य वजह रिटेल और एथनिक फूड मार्केट्स में आम की जबरदस्त मांग थी।
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