दिग्गज निवेशक और अरबपति वॉरेन बफे (Warren Buffett) ने युवाओं को स्पष्ट रूप से लिखना और बोलना सीखने पर ध्यान देने की सलाह दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, "अपनी वैल्यू को कम से 50 फीसदी तक बढ़ाने का सबसे आसान तरीका यह है कि अपने कम्युनिकेशंस स्किल्स को बेहतर बनाएं। इसमें बोलना और लिखना दोनों शामिल है।"
इस वीडियो को कनाडा की एक स्टार्टअप 'वॉयसफ्लो (Voiceflow)' के को-फाउंडर माइकल हूड ने पोस्ट किया है। उनका स्टार्टअप बिना कोडिंग के मदद के यूजर्स को एमेजॉन (Amazon) के स्मार्ट स्पीकर एलेक्सा के लिए स्किल्स डिजाइन करने, उसे बनाने और लॉन्च करने की सुविधा देता है।
वीडियो में Warren Buffett कहते हैं, "अगर आपका कम्युनिकेशंस नहीं कर सकते हैं, तो यह अंधेरे में किसी लड़की को आंख से इशारा करना जैसा है, जिसका कोई फायदा नहीं होता है। आपके पास दुनिया भर का ज्ञान है, लेकिन अगर आप इसे दूसरों को कम्युनिकेट नहीं सकते तो इसका कोई फायदा नहीं।"
दुनिया के 7वें सबसे अमीर आदमी है वॉरेन बुफे
फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक, वॉरेन बुफे के पास अभी करीब 99.8 अरब डॉलर की संपत्ति है और वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 7वें स्थान पर है। 91 वर्षीय वॉरेन बफे, अमेरिकी कंपनी बार्कशायर हैथवे के सीईओ हैं।
99% संपत्ति दान में देने का किया है ऐलान
अरबपति इनवेस्टर वॉरेन बफे (Warren Buffett) के निधन के बाद उनकी सपंत्ति का कुछ हिस्सा दुनियाभर के बच्चों के बीच बांटा जा सकता है। Berkshire Hathaway के सीईओ ने 2006 में कंपनी में अपने 85 फीसदी शेयर दान करने का वादा किया था। इसका बड़ा हिस्सा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) को जाता।
बफे ने 2010 में अपनी संपत्ति का 99 फीसदी हिस्सा परोपकार के लिए देने का वादा किया। इस तरह बर्कशायर में 90 अरब डॉलर की उनकी हिस्सेदारी में से 56 अरब डॉलर गेट्स फाउंडेशन को जाएगा। 17.4 अरब डॉलर परिवार के चार चैरिटी ऑर्गेनाइजेशंस को जाएगा। इसके बाद 18.7 अरब डॉलर बच जाएगा। बताया जाता है कि बफे चाहते हैं कि उनकी संपत्ति उनके निधन के 10 साल के अंदर खर्च कर दी जाए
बफे इस साल अगस्त में 92 साल के हो जाएंगे। उन्होंने यह नहीं बताया है कि अगर उनकी मौत के बाद यह पैसा गेट्स फाउंडेशन को मिलता है तो इसे दुनिया के बच्चों में किस तरह से बांटा जाएगा। अगर ऐसा होता है तो इससे दुनिया में आर्थिक-सामाजिक बराबरी लाने में मदद मिलेगी। बच्चों के माता-पिता को फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिलेगी, जिसे वे अपने बच्चों को देना चाहते हैं।