एमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर मुकदमा करेगा BIS, मांगेगा भारी मुआवजा; जानिए क्या है पूरा मामला

BIS ने मार्च 2025 में Amazon और Flipkart के गोदामों पर छापेमारी कर हजारों बिना सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट जब्त किए। अब BIS इन कंपनियों पर केस दर्ज कर 10 गुना मुआवजा और कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Jun 05, 2025 पर 4:51 PM
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BIS अब एमेजॉन और फ्लिपकार्ट से जब्त किए गए सामान के मूल्य का 10 गुना तक मुआवजा मांग सकता है।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) दो दिग्गज ईकॉमर्स कंपनियों- एमेजॉन (Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) के खिलाफ मुकदमा दायर करने की तैयारी में है। BIS का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में ऐसे प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे हैं, जो अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन के बिना थे। यह मामला मार्च 2025 में की गई छापेमारी के बाद सामने आया है।

मार्च 2025 में हुई थी छापेमारी

BIS की दो टीमों ने मार्च 2025 में Amazon और Flipkart के वेयरहाउस पर छापा मारा था। इस दौरान BIS Act 2016 के तहत हजारों की संख्या में ऐसे उत्पाद जब्त किए गए, जिन पर जरूरी BIS मार्क नहीं था। ये सामान क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) का उल्लंघन कर रहे थे। QCO के मुताबिक, कुछ खास कैटेगरी के प्रोडक्ट बिना BIS सर्टिफिकेशन के बेचे या स्टोर नहीं किए जा सकते।


Amazon से क्या जब्त किया गया?

BIS की छापेमारी में Amazon (चेन्नई) के गोदाम से 3,000 से ज्यादा प्रोडक्ट जब्त किए गए थे। इनमें इंसुलेटेड फ्लास्क, फूड कंटेनर, मेटलिक वाटर बॉटल, सीलिंग फैन और टॉयज शामिल थे। कुल वैल्यू लगभग ₹36 लाख बताई गई।

Flipkart के पास क्या मिला?

फ्लिपकार्ट से जब्त सामान में 286 पैक बेबी डायपर (प्रत्येक में 42 पीस), 36 कासेरोल बॉक्स, 26 स्टेनलेस स्टील बॉटल और 10 इंसुलेटेड बॉटल शामिल थीं। BIS ने फ्लिपकार्ट से जब्त सामान की वैल्यू का खुलासा नहीं किया है।

10 गुना देना पड़ सकता है मुआवजा

BIS अब एमेजॉन और फ्लिपकार्ट से जब्त किए गए सामान के मूल्य का 10 गुना तक मुआवजा मांग सकता है। उसे यह अधिकार BIS अधिनियम, 2016 के तहत मिला है। साथ ही, BIS इन कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामला भी दायर कर सकता है। यह केस मजिस्ट्रेट कोर्ट में फाइल किया जाएगा।

क्या है BIS की भूमिका

BIS असल में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था है। यह भारत में उत्पादों और सेवाओं के लिए गुणवत्ता मानक तय करती है। इसके अनुसार, कई उत्पाद कैटेगरी के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य है। इस मार्क के बिना बेचा गया सामान ग्राहकों की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है।

BIS ने अपने बयान में साफ कहा है कि बिना प्रमाणन के उत्पाद बेचना कानूनन अपराध है और इससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा को सीधा खतरा होता है। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि वह आगे और भी सख्त कार्रवाई कर सकती है, ताकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को सख्त सिग्नल मिले।

Amazon और Flipkart को इस मामले में टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक दोनों कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

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