Dolo 650 : माइक्रो लैब्स (Micro Labs) के चेयरमैन और एमडी दिलीप सुराना ने कहा कि डोलो-650 दशकों से भारत में सुझाया जाने वाला नंबर वन पैरासिटामोल (paracetamol) 650 एमजी ब्रांड बना हुआ है। भारत के डॉक्टरों के बीच यह हमेशा से एक लोकप्रिय ब्रांड बना हुआ है। हालांकि, उन्हें हाल में मिली डोलो-650 को इतनी लोकप्रियता की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी, क्योंकि कंपनी ने इस टैबलेट का पब्लिक के बीच सीधे विज्ञापन नहीं किया था। सुराना ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं।
लॉकडाउन के दौरान घर-घर दी जा रही थी डोलो-650 खाने की सलाह
माइक्रोलैब्स के सीएमडी ने कहा कि वह डोलो 650 की लोकप्रियता की कई वजह बता सकते हैं। उन्होंने कहा, “कोविड (COVID) के प्रमुख लक्षणों में बुखार और सिरदर्द शामिल हैं, जिनके लिए डोलो-650 अच्छा उपचार साबित हुई है। क्वारंटाइन (quarantine) और लॉकडाउन (lockdown) के दौरान, जब डॉक्टर पर्सनली मरीजों को नहीं देख रहे थे और वाट्सऐप और वॉयस मैसेज पर डोलो-650 खाने की सलाह दी जा रही थी। इसकी सलाह एक मरीज से दूसरे तक पहुंच रही थी और देश भर में परिवारों तक यह पहुंच गई थी।”
मिलेजुले प्रयासों से मिली सफलता
डोलो-650 ने कोविड-19 वैक्सीनेशन अभियान को बढ़ावा देने में भी मदद की। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान हमारे 600 से ज्यादा मेडिकल रिप्रिजेंटेटिव्स और मैनेजर्स ने फील्ड में काम किया और सुनिश्चित किया कि डोलो-650 उस हर जगह उपलब्ध हो, जहां उसकी जरूरत है। सभी के मिलेजुले प्रयासों से ही कंपनी सफलता की कहानी लिख सकी।
1993 में लॉन्च हुई थी डोलो 650
डोलो 650 बनाने के विचार, उससे जुड़ी चुनौतियों के सवाल पर सुराना ने कहा कि पैरासिटामोल 500 एमजी की बाजार में भरमार है और हम एक अलग पैरासिटामोल लाना चाहते थे। उन्होंने कहा, “कंपनी डॉक्टरों के साथ चर्चा की और बुखार के रोकथाम से जुड़ी कई कमियां पाईं। पैरासिटामोल 500 एमजी से बुखार में राहत और दर्द पर्याप्त नहीं था। डोलो 650 इस अंतर को दूर करने के लिए काफी थी और इसीलिए 1993 में यह लॉन्च की गई थी।”
उन्होंने माना कि 650 एमजी की टैबलेट के साइज और शेप को आसानी से निगलने वाला बनाने से जुड़ी कई चुनौतियां थीं। ओवल (अंडाकार) शेप की टैबलेट बनाकर इस चुनौती से पार पाया जा सका।