RBL Bank : आरबीएल बैंक के टॉप मैनेजमेंट ने रविवार की शाम और उसके बाद रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्लैरिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि उसका बिजनेस सामान्य है। इस तरह दोनों ने बैंक के इनवेस्टर्स और डिपॉजिटर्स की चिंताओं को शांत करने की कोशिश की।
RBL Bank : आरबीएल बैंक के टॉप मैनेजमेंट ने रविवार की शाम और उसके बाद रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्लैरिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि उसका बिजनेस सामान्य है। इस तरह दोनों ने बैंक के इनवेस्टर्स और डिपॉजिटर्स की चिंताओं को शांत करने की कोशिश की।
25 दिसंबर को आरबीआई द्वारा बैंक के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर की नियुक्ति और एमडी एवं सीईओ विश्ववीर आहूजा के छुट्टी पर जाने के बार ऐसा करना जरूरी था। आरबीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव आहूजा को अंतरिम सीईओ नामित किया गया। भले ही आहूजा और आरबीआई ने मुख्य रूप से बैंक की कैपिटल पोजिशन और फाइनेंसियल स्टैबिलिटी पर बात की, लेकिन कुछ अहम सवालों के जवाब फिर भी नहीं मिल सके।
आरबीआई ने क्यों अचानक आरबीएल बोर्ड में एक एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त कर दिया?
कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान राजीव आहूजा ने कहा कि वह आरबीआई की तरफ से बात नहीं कर सकते। 27 दिसंबर को आरबीआई ने कहा कि “रेग्युलेटरी/ सुपरवाइजरी मामलों में बोर्ड को सपोर्ट की जरूरत महसूस होने पर” प्राइवेट बैंकों में एडिशनल डायरेक्टर्स की नियुक्ति की जाती है। रेग्युलेटरी भाषा में इसका मतलब है, “हम आपके कामकाज से खुश नहीं हैं और इसलिए आप चाहें या न चाहें आपके ऊपर नजर रखने की जरूरत है।”
बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 का सेक्शन 36एबी कहता है, “यदि आरबीआई को बैंकिंग कंपनी या उसके डिपॉजिटर्स के हित में लगता है कि तो वह बैंकिंग कंपनी के एडिशनल डायरेक्टर्स के रूप में एक या ज्यादा लोगों को नियुक्त कर सकता है।”
इसी क्लैरिफिकेशन में आरबीआई ने कहा कि आरबीएल बैंक “अच्छी तरह कैपिटलाइज है और उसकी फाइनेंशियल पोजिशन संतोषजनक है।”
तो यदि कैपिटल की कोई चिंता नहीं है और फाइनेंशियल पोजिशन संतोषजनक है तो सेक्शन 36एबी का इस्तेमाल करने की जरूरत क्यों लगी?
एमडी और सीईओ विश्ववीर आहूजा अचानक छुट्टी पर क्यों चले गए?
सीईओ विश्ववीर आहूजा के छुट्टी पर जाने पर कोई संतोषजनकर स्पष्टीकरण नहीं था। वह 2010 से बैंक के साथ थे। भले ही इसके पीछे निजी कारण बताए गए, लेकिन ऐसी अटकलें हैं कि बैंक और आहूजा अपना कार्यकाल जारी रहने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन रेग्युलेटर ने इनकार कर दिया।
याद कीजिए, इसी साल आरबीएल ने आहूजा की तीन साल के लिए फिर से नियुक्ति करने को आरबीआई से मंजूरी मांगी थी। हालांकि रेग्युलेटर ने 30 जून, 2021 से एक साल के लिए नियुक्ति की मंजूरी दी। आरबीआई नियमों के मुताबिक, 59 वर्षीय आहूजा कम से कम 2025 तक री-अप्वाइंटमेंट के लिए इलिजिबिल थे, तो फिर क्यों एक साल के लिए मंजूरी दी गई?
बैंक में क्या गलत हुआ, जो ऐसा एक्शन लेना पड़ा?
आरबीआई ने कहा कि “अटकलों पर डिपॉजिटर्स और स्टेकहोल्डर्स को प्रतिक्रिया देने की कोई जरूरत नहीं है।” यदि बैंक में सब कुछ ठीक है तो रेग्युलेर को बैंक के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्ट की नियुक्ति की जरूरत क्यों पड़ी?
विश्ववीर आहूजा ने विदाई नोट क्यों नहीं छोड़ा?
आहूजा ने बैंक को छोटे प्राइवेट बैंकों में जाना माना नाम बनाने में अहम भूमिका निभाई। बैंक की वेबसाइट करती है, “उनके कार्यका के दौरान बैंक की बैलेंसशीट 25 गुनी बढ़ गई। अगस्त, 2016 में वह हाल के इतिहास का देश का सबसे सफल आईपीओ लाए, जो 70 गुना सब्सक्राइब हुआ और 22 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुआ।”
क्यों इतने अनुभवी बैंकर को शेयरहोल्डर्स या कस्टमर्स के लिए कोई स्टेटमेंट दिए बिना अचानक जाना पड़ा? ऐसा करके इनवेस्टर्स की इतनी तेज प्रतिक्रिया से बचा जा सकता था।
आरबीआई के फैसले के चलते 27 दिसंबर को आरबीएल बैंक के शेयर में 18 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
यदि आरबीएल के फाइनेंसेस ठीक हैं तो मुद्दा क्या है?
रविवार को कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान अंतरिम सीईओ आहूजा ने दोहराया कि बैंक के पास 15,000 करोड़ रुपये का सरप्लस कैश है। आहूजा ने जोर देकर कहा कि असेट क्वालिटी लगातार सुधर रही है और अब स्टेबल दिखती है। बैंक रिस्की अनसिक्योर्ड लेंडिंग बुक को घटाकर लोन बुक को रिबैलेंस कर रहा है।
तर्कों पर यकीन नहीं कर पा रहे एनालिस्ट
एनालिस्ट उनके स्पष्टीकरणों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा कि आरबीएल बैंक को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। ब्रोकरेज ने कहा, “मैनेजमेंट द्वारा इतनी बात कहने से बैंक के बिजनेस फंडामेंटल्स या उसकी स्ट्रैटजी को लेकर कुछ जाहिर नहीं होता है।” उसने कहा कि इस कदम से विभिन्न स्टेकहोल्डर्स पर असर के कारण आगे निगरानी बनी रहेगी।
एमके एनालिस्ट्स ने कहा कि आरबीआई के अधिकारी की नियुक्ति पर मैनेजमेंट ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। एमके ने अपने नोट में कहा, “हमारा मानना है कि इनवेस्टर्स का भरोसा हासिल करने के लिए अभी और स्पष्टीकरणों की जरूरत होगी।”
पहली नजर में ये स्पष्टीकरण कैपिटल और असेट क्वालिटी की चिंता को खारिज करते हैं, लेकिन क्रिसमस डे पर अचानक लिए गए फैसलों की वास्तवक वजहों पर उठे सवालों के अभी तक जवाब नहीं मिले हैं।
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