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RBL Bank : जवाबों से ज्यादा सवाल अभी भी बाकी हैं

भले ही आरबीआई और आरबीएल बैंक के टॉप मैनेजमेंट ने मुख्य रूप से बैंक की कैपिटल पोजिशन और फाइनेंसियल स्टैबिलिटी पर बात की, लेकिन कुछ अहम सवालों के जवाब फिर भी नहीं मिल सके।

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 28, 2021 पर 4:38 PM
RBL Bank : जवाबों से ज्यादा सवाल अभी भी बाकी हैं
आरबीएल बैंक को लेकर इनवेस्टर्स और डिपॉजिटर्स की चिंताएं अभी भी दूर नहीं हुई हैं

RBL Bank : आरबीएल बैंक के टॉप मैनेजमेंट ने रविवार की शाम और उसके बाद रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्लैरिफिकेशन जारी करते हुए कहा कि उसका बिजनेस सामान्य है। इस तरह दोनों ने बैंक के इनवेस्टर्स और डिपॉजिटर्स की चिंताओं को शांत करने की कोशिश की।

25 दिसंबर को आरबीआई द्वारा बैंक के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर की नियुक्ति और एमडी एवं सीईओ विश्ववीर आहूजा के छुट्टी पर जाने के बार ऐसा करना जरूरी था। आरबीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव आहूजा को अंतरिम सीईओ नामित किया गया। भले ही आहूजा और आरबीआई ने मुख्य रूप से बैंक की कैपिटल पोजिशन और फाइनेंसियल स्टैबिलिटी पर बात की, लेकिन कुछ अहम सवालों के जवाब फिर भी नहीं मिल सके।

आरबीआई ने क्यों अचानक आरबीएल बोर्ड में एक एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त कर दिया?

कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान राजीव आहूजा ने कहा कि वह आरबीआई की तरफ से बात नहीं कर सकते। 27 दिसंबर को आरबीआई ने कहा कि “रेग्युलेटरी/ सुपरवाइजरी मामलों में बोर्ड को सपोर्ट की जरूरत महसूस होने पर” प्राइवेट बैंकों में एडिशनल डायरेक्टर्स की नियुक्ति की जाती है। रेग्युलेटरी भाषा में इसका मतलब है, “हम आपके कामकाज से खुश नहीं हैं और इसलिए आप चाहें या न चाहें आपके ऊपर नजर रखने की जरूरत है।”

बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 का सेक्शन 36एबी कहता है, “यदि आरबीआई को बैंकिंग कंपनी या उसके डिपॉजिटर्स के हित में लगता है कि तो वह बैंकिंग कंपनी के एडिशनल डायरेक्टर्स के रूप में एक या ज्यादा लोगों को नियुक्त कर सकता है।”

इसी क्लैरिफिकेशन में आरबीआई ने कहा कि आरबीएल बैंक “अच्छी तरह कैपिटलाइज है और उसकी फाइनेंशियल पोजिशन संतोषजनक है।”

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