बजट 2023: काफी समय बाद बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) में रौनक लौटती दिख रही है। बैंकों खासकर सरकारी बैंकों (PSU Banks) का एनपीए (NPA) कम हो रहा है। क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) अच्छी है। सितंबर तिमाही के नतीजों में बैंकों के प्रदर्शन में सुधार दिखा है। इसलिए बैंकिंग सेक्टर को भी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के अगले बजट से काफी उम्मीदें हैं। सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करने वाली हैं। बैंकिंग सेक्टर का मानना है कि फाइनेंस मिनिस्टर कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने और डिजिटल एक्सपैंशन पर नए इनवेस्टमेंट का ऐलान बजट में कर सकती हैं। मनीकंट्रोल ने इस बारे में बैंकिंग सेक्टर की बजट से उम्मीदों के बारे में जानने के लिए कई बैंकरों से बातचीत की।
कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की उम्मीद
मनीकंट्रोल ने साऊथ इंडियन बैंक के एमडी एवं सीईओ मुरली रामकृष्णन से बैंकिंग सेक्टर की चुनौतियों और बजट से लेकर उनकी उम्मीदों के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि फाइनेंस मिनिस्टर इस बार बजट में कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव का ऐलान कर सकती हैं। ऐसा करने से इकोनॉमी में कंजम्प्शन बढ़ेगा। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि सरकार फिस्कल डेफिसिट के 6.4 फीसदी टारगेट (जीडीपी का) को बनाए रखेगी। इसकी वजह यह है कि नॉन-एक्साइज टैक्स कलेक्शंस बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि थोड़े बहुत डेविएशन के बावूजद फिस्कल डेफिसिट 6.4 फीसदी से ऊपर नहीं जाएगा। अगले वित्त वर्ष के लिए टारगेट 6 फीसदी हो सकता है।"
NPA के जल्द निपटारे के लिए लीगल सिस्टम में सुधार जरूरी
उन्होंने कहा कि सरकार बजट में NRI के डिजिटल नो-योर-कस्टमर (KYC) के लिए Happy Cards की शुरुआत कर सकती है। इसके अलावा उसका फोकस फाइनेंशियल इनक्लूजन पर होगा। वह सरकारी बैंकों को बॉन्ड इश्यू के जरिए ओपन मार्केट से ज्यादा पैसे जुटाने की इजाजत भी दे सकती है। सरकार एग्री क्रेडिट बढ़ाने पर भी फोकस बढ़ा सकती है। NPA के मामलों के जल्द निपटारे के लिए लीगल सिस्टम को मजबूत बनाना भी जरूरी है।
डिसइनवेस्टमेंट पर रहेगा फोकस
Bank of Baroda के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा के फाइनेंस मिनिस्टर का फोकस सही जगह खर्च करने पर होगा। सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च बढ़ा सकती है। वह डेफिसिट में 0.5-.75 फीसदी की कमी लाने का ऐलान भी बजट में कर सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर लोगों को इनकम टैक्स में भी कुछ राहत दे सकती हैं। इससे कंजम्प्शन बढ़ाने में मदद मिलेगी। मेरा मानना है कि इस बार बजट में डिसइनवेस्टमेंट के लिए 40,000-50,000 का टारगेट सरकार तय कर सकती है।
रोजगार के मौके बढ़ाने वाले उपायों के ऐलान की उम्मीद
IDFC First Bank की इंडिया इकोनॉमिस्ट गौरा सेन गुप्ता का मानना है कि अगले यूनियन बजट में सरकार फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने पर फोकस कर सकती है। आर्थिक स्थिरता के लिहाज से यह बहुत जरूरी है। जहां तक कैपिटल एक्सपेंडिचर की बात है तो ऐसा लगता है कि इसमें ग्रोथ जारी रहेगी। इसकी वजह है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में सब्सिडी पर होने वाला खर्च कम रहने की उम्मीद है। उधर, कोरोना की महामारी से बेहाल एमएसएमई सेक्टर को भी मदद की जरूरत है। सरकार PLI स्कीम का दायरा बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के मौके बढ़ाने पर भी फोकस कर सकती है।