यूनियन बजट 2022 की तिथि एकदम करीब आ गई है। ऐसे में तमाम इंडस्ट्री इनसाइडर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से अपनी मांग मांगने की गुहार कर रहे हैं। इस लिस्ट में इंश्योरेंस कंपनियां भी शामिल है। इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े दिग्गजों की नरेंद्र मोदी सरकार से मांग है कि लाइफ इंश्योरेंस के लिए इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत एक अलग डिडक्शन लिमिट तय की जानी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसा होने से समाज में इंश्योरेंस का विस्तार होगा।
Bonanza Insurance Brokers के अभिषेक मिश्रा का कहना है कि मेडिकल साइंस में पिछले कुछ सालों के दौरान काफी प्रगति हुई है लेकिन इसके साथ ही इलाज के खर्च में भी तेज बढ़ोतरी हुई है जिसको ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी वर्ग के करदाताओं के लिए मेडिकल क्लेम लिमिट में बढ़ोतरी करना जरुरी है।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत कई निवेश विकल्पों के आने के चलते छोटे इन्वेस्टमेंट नजरिए वाले लोग अक्सर लाइफ इंश्योरेंस की उपेक्षा कर देते हैं जो कि एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट है। लाइफ इंश्योरेंस के लिए सेक्शन 80C के तहत अलग डिडक्शन निर्धारित होने से देश में इंश्योरेंस कल्चर के विस्तार में काफी सहायता मिलेगी।
इसी तरह Probus Insurance के राकेश गोयल का कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80D के तहत कोई इडिविजुअल अपने और अपने परिवार के लिए मेडिकल क्लेम प्रीमियम पर 25000 रुपये के डिडक्शन का क्लेम कर सकता है। इस लिमिट को बढ़ाकर 50,000 से बढ़ाकर 75000 रुपये किया जाना चाहिए। चिकित्सा खर्च में आ रही बढ़ोतरी और गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों की वजह से निम्न आय वर्ग के लिए इस तरह की छूट की जरुरत है। टैक्स डिडक्शन लिमिट में बढ़ोतरी से देश में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।